नतीजों में कैसे आई बंपर ग्रोथ?
Ventive Hospitality Limited के लिए 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के वित्तीय नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं। कंपनी नेconsolidated रेवेन्यू में सालाना आधार पर (YoY) 28% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की, जो ₹6,855 मिलियन तक पहुंच गया। लेकिन असली धमाका Profit After Tax (PAT) में देखने को मिला, जो 305% की अभूतपूर्व उछाल के साथ ₹1,405 मिलियन हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा ₹347 मिलियन था।
नौ महीनों (9M FY26) की अवधि में भी कंपनी ने शानदार वापसी की है। Consolidated रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹16,823 मिलियन रहा, और PAT ₹2,427 मिलियन पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹1,031 मिलियन का घाटा हुआ था।
Q3 FY26 में consolidated EBITDA 25% बढ़कर ₹3,475 मिलियन रहा, और EBITDA मार्जिन 48% की मजबूत स्थिति में रहा। इस ग्रोथ का मुख्य इंजन हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट रहा, जहाँ consolidated हॉस्पिटैलिटी रेवेन्यू 35% बढ़ा। खासकर, इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी ऑपरेशंस ने खूब दम दिखाया, जहाँ रेवेन्यू 46% और EBITDA 73% बढ़ा। इसका श्रेय Higher Average Daily Rate (ADR) और ऑक्यूपेंसी को जाता है। भारत के हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में रेवेन्यू 22% और EBITDA 35% बढ़ा। Annuity बिजनेस सेगमेंट ने भी 15% रेवेन्यू ग्रोथ में योगदान दिया।
ऑपरेशनल लेवल पर, ADR 14% बढ़कर ₹24,573 और RevPAR 18% बढ़कर ₹15,437 रहा, जबकि ऑक्यूपेंसी 64% पर मजबूत बनी रही। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसकी सब्सिडियरीज को अगस्त 2024 में अधिग्रहित किया गया था, और FY25 के आंकड़े प्रो-फॉर्मा आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। फाइनेंसिंग कॉस्ट में 39% (तिमाही) और 46% (नौ महीने) की कमी ने भी मुनाफे को बढ़ाने में मदद की।
31 दिसंबर, 2025 तक, consolidated नेट डेट ₹16,671 मिलियन था, जिसमें Net Debt to Equity रेशियो 0.3x और Net Debt to EBITDA (TTM) रेशियो 1.4x रहा। 9M अवधि में 'Other Income' में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जिसका एक कारण नॉन-रिकरिंग फॉरेन एक्सचेंज गेन्स थे।
आगे की राह और ग्रोथ की प्लानिंग
Ventive Hospitality ने अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर फोकस किया है, जिसमें लक्जरी हॉस्पिटैलिटी प्लेटफॉर्म का विस्तार शामिल है। कंपनी के पास अगले 5 सालों में 1,900 से ज्यादा Keys जोड़ने का डेवलपमेंट पाइपलाइन है। यह विस्तार नए प्रोजेक्ट्स और अधिग्रहणों के जरिए होगा। भारत और श्रीलंका में प्रोजेक्ट्स की योजना है, साथ ही प्रमोटर ग्रुप से ROFO (Right of First Offer) एसेट्स भी शामिल हैं। मैनेजमेंट का लक्ष्य अगले 5 सालों में अपनी परफॉर्मेंस को 2 गुना करना है, जो पिछले 5 सालों के प्रदर्शन को दोहराएगा। इस ग्रोथ के पीछे बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, कॉर्पोरेट ट्रैवल की बढ़ती मांग और प्रमुख बाजारों में सप्लाई की कमी जैसे कारण हैं। निवेशकों को इस महत्वाकांक्षी डेवलपमेंट पाइपलाइन के सफल क्रियान्वयन और नए अधिग्रहणों के इंटीग्रेशन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।