श्रीलंका डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भारतीय परिवारों की पहली पसंद बनकर उभरा है। 2025 में इस सेक्टर में 25% की ज़बरदस्त ग्रोथ देखी गई है, और अब यहाँ शादियों का औसत बजट ₹1.5 करोड़ तक पहुँच गया है।
भारतीय शादियों का नया पता: श्रीलंका
साल 2025 में भारतीय शादियों के लिए श्रीलंका एक बेहद लोकप्रिय डेस्टिनेशन के तौर पर सामने आया है। यहाँ भारतीय जोड़ों और परिवारों के बीच डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन 25% तक बढ़ा है। इसकी मुख्य वजहें हैं लक्ज़री हॉस्पिटैलिटी (luxury hospitality) और बेहतर लॉजिस्टिक्स (logistics) की सुविधा। इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म WedMeGood के आंकड़ों के अनुसार, डेस्टिनेशन वेडिंग्स अब कुल शादियों का 25% हिस्सा हैं, और यह आंकड़ा 2028 तक 32% तक पहुंचने की उम्मीद है।
हॉस्पिटैलिटी पर असर और खर्च का गणित
श्रीलंका की बढ़ती पॉपुलैरिटी के कारण शादियों पर होने वाले खर्च का गणित भी बदल रहा है। अब इंटरनेशनल डेस्टिनेशन वेडिंग्स पर औसतन ₹1.5 करोड़ खर्च हो रहे हैं, जबकि डोमेस्टिक डेस्टिनेशन वेडिंग्स का बजट ₹58 लाख है। इतना ही नहीं, इन शादियों की अवधि भी बढ़ी है, जो पहले 1.8 दिन होती थी, अब बढ़कर 3.2 दिन हो गई है। इसका सीधा फायदा श्रीलंका में मौजूद हाई-एंड हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स जैसे शंगरी-ला (Shangri-La) ग्रुप (जो कोलंबो और हम्बनटोटा में प्रॉपर्टीज मैनेज करता है) और स्थानीय प्लेयर्स जैसे Amaya Hills और Jetwing Lagoon को हो रहा है।
थाईलैंड को टक्कर, क्षेत्रीय समीकरण
हालांकि थाईलैंड अभी भी 2.5 मिलियन सालाना यात्रियों के साथ इस मार्केट में आगे है (जो पिछले साल के मुकाबले 16% ज्यादा है), श्रीलंका प्रीमियम वेडिंग सेगमेंट में तेजी से अंतर पाट रहा है। श्रीलंका की बढ़ती मांग की एक वजह यहाँ की स्थिरता और पहुंच है, खासकर जब एशिया के कुछ हिस्सों में ट्रैवल को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में जियोपॉलिटिकल अस्थिरता (geopolitical instability) ने लग्जरी ट्रैवलर्स के लिए लॉजिस्टिक्स को जटिल बना दिया है, जिससे वेडिंग प्लानर्स अब ऐसी जगहों को पसंद कर रहे हैं जहाँ एयर ट्रैवल ज्यादा भरोसेमंद हो और वीज़ा प्रक्रिया आसान हो।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए यह एक अहम डेवलपमेंट है। श्रीलंका में लग्जरी प्रॉपर्टीज की ऑक्यूपेंसी (occupancy) और एवरेज रूम रेट्स (average room rates) बढ़ने की उम्मीद है। जैसे-जैसे डेस्टिनेशन वेडिंग मार्केट और परिपक्व होगा, हॉस्पिटैलिटी फर्म्स के लिए ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वे इस बढ़ती मांग को कैसे मैनेज करते हैं और बड़े इवेंट्स के लिए सर्विस क्वालिटी कैसे बनाए रखते हैं। निवेशकों को क्षेत्रीय ट्रैवल लागत में उतार-चढ़ाव, स्थानीय पर्यटन नीतियों में बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए, ताकि वह बढ़ती संख्या में बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को संभाल सके। इस ग्रोथ की दीर्घकालिक स्थिरता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि क्या एक्सपीरियंस-आधारित वेडिंग्स (experience-led weddings) भारतीय परिवारों के लिए प्राथमिकता बनी रहती है, खासकर जब शादियों के बजट आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं।
