Q3 FY26: कैसे चमका Sayaji Hotels का प्रदर्शन?
Sayaji Hotels (Indore) Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने अन-ऑडिटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश किए हैं। कंपनी ने इस दौरान रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 6.53% YoY का इजाफा करते हुए ₹3,213.37 लाख (₹32.13 करोड़) का आंकड़ा छुआ। टॉप-लाइन में इस ग्रोथ के साथ-साथ, कंपनी ने कॉस्ट कटिंग पर भी ध्यान दिया, जिससे प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में 92.02% YoY की जबरदस्त उछाल आई और यह ₹527.47 लाख (₹5.27 करोड़) पर पहुंच गया। नतीजतन, नेट प्रॉफिट में 29.43% YoY की बढ़त दर्ज हुई, जो ₹586.97 लाख (₹5.87 करोड़) रहा। वहीं, बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी 29.53% YoY बढ़कर ₹1.93 हो गया।
9 महीने की कहानी: प्रॉफिट में क्यों आई गिरावट?
हालांकि, 9 महीने की अवधि (जो दिसंबर 2025 को समाप्त हुई) के नतीजों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी मिली-जुली और चिंताजनक लगती है। इस अवधि में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में मामूली 1.03% YoY की ग्रोथ देखी गई, जो ₹7,695.43 लाख (₹76.95 करोड़) रही। लेकिन, कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ी गिरावट आई। PBT में 37.70% YoY की कमी आई और यह ₹811.47 लाख (₹8.11 करोड़) पर आ गया। नेट प्रॉफिट भी 25.91% YoY गिरकर ₹783.21 लाख (₹7.83 करोड़) दर्ज किया गया। इसके चलते, बेसिक EPS में 30.54% YoY की गिरावट आई और यह ₹2.57 पर पहुंच गया।
बड़ा सिरदर्द: IDA के साथ लीज डिस्प्यूट
Sayaji Hotels (Indore) Limited के सामने सबसे बड़ा लीगल और ऑपरेशनल चैलेंज इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) के साथ चल रहा लीज डिस्प्यूट है। IDA ने दिसंबर 2017 में होटल की लीज को रद्द कर दिया था और बेदखली की कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस डिस्प्यूट की वजह से प्रॉपर्टी के लीज स्टेटस को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जो कंपनी के ऑपरेशन और फाइनेंशियल हेल्थ पर एक बड़ी छाया डाल रही है। इन अनिश्चितताओं के बावजूद, कंपनी अपने फाइनेंशियल अकाउंट्स को 'गोइंग कंसर्न बेसिस' (going concern basis) पर तैयार कर रही है। इसके अलावा, डिस्प्यूट के चलते एसोसिएटेड स्टाम्प ड्यूटी का भी अभी तक कोई फैसला नहीं आया है और इसे मौजूदा खातों में प्रोविजन (provision) नहीं किया गया है।
कंपनी की ओर से कोई स्पेसिफिक फ्यूचर गाइडेंस या कॉनकॉल कमेंट्री नहीं दी गई है, जिससे आउटलुक काफी हद तक लीज डिस्प्यूट के समाधान और बाजार की ओवरऑल कंडीशन पर निर्भर करेगा। निवेशकों को IDA के साथ चल रहे इस कानूनी मामले पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह भविष्य में कंपनी की ऑपरेशनल कंटिन्यूटी और फाइनेंशियल हेल्थ का मुख्य निर्धारक साबित होगा।