Rajasthan Tourism: ₹3,000 करोड़ का बड़ा दांव, अब लग्जरी के साथ 'मास-प्रीमियम' पर राजस्थान सरकार की नजर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Rajasthan Tourism: ₹3,000 करोड़ का बड़ा दांव, अब लग्जरी के साथ 'मास-प्रीमियम' पर राजस्थान सरकार की नजर

राजस्थान सरकार टूरिज्म सेक्टर को बूस्ट देने के लिए **₹3,000 करोड़** का निवेश करने जा रही है। इस नई पहल का मकसद अब केवल अल्ट्रा-लग्जरी टूरिज्म तक सीमित न रहकर मिड-मार्केट ट्रेवलर्स को लुभाना है, जिससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

राजस्थान सरकार अपनी टूरिज्म स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव कर रही है। राज्य अब शाही महलों और लग्जरी होटलों के साथ-साथ ₹35 लाख से ₹70 लाख के प्राइस बैंड वाले मास-प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस कर रहा है। इस ₹3,000 करोड़ के निवेश का मुख्य लक्ष्य कॉर्पोरेट इवेंट्स, शादियों और वॉल्यूम-बेस्ड टूरिज्म को बढ़ावा देना है।

क्यों है यह बदलाव जरूरी?

अब तक राजस्थान मुख्य रूप से हाई-एंड लग्जरी टूरिज्म के लिए जाना जाता रहा है, जो काफी हद तक सीजनल होता है। FY26 से FY30 के बीच आने वाले नए होटलों में करीब 45% हिस्सा मिड-मार्केट और प्रीमियम सेगमेंट का है। सरकार की कोशिश है कि टूरिज्म को केवल लग्जरी शादियों पर निर्भर न रखकर पूरे साल एक स्थिर डिमांड बनी रहे।

जयपुर-उदयपुर से आगे का सफर

टूरिज्म को नए इलाकों तक पहुँचाने के लिए सरकार शेखावाटी और घाणेराव जैसे क्षेत्रों पर जोर दे रही है। हॉस्पिटैलिटी कंपनियों के लिए यह अपनी मौजूदगी बढ़ाने का एक सुनहरा मौका है, खासकर उन चेन होटल्स के लिए जो मिड-स्केल और अपस्केल सेगमेंट में काम करते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर ही है असली चुनौती

इस प्लान की सफलता काफी हद तक कनेक्टिविटी पर टिकी है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिल्ली-जोधपुर वंदे भारत जैसी रेल सेवाओं का जैसलमेर जैसे इलाकों तक विस्तार बहुत जरूरी है। अगर रोड और रेल कनेक्टिविटी बेहतर नहीं हुई, तो इन नए प्रॉपर्टीज में ऑक्यूपेंसी (Occupancy) बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

इन्वेस्टर्स के लिए यह देखना जरूरी होगा कि सरकार इन प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से जमीन पर उतारती है। इसके अलावा, होटल ऑपरेटर्स कितनी कुशलता से सीजनल डिमांड के बिना इन नए क्षेत्रों में ऑक्यूपेंसी मेंटेन करते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर ही वो कैटलिस्ट होंगे जो इन क्षेत्रों को कॉर्पोरेट ऑफसाइट्स (Corporate Offsites) और फैमिली ट्रेवल का हब बना पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.