Radisson Hotel Group ने भारत में अपने पोर्टफोलियो को बड़ा करने की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य **2030** तक देश भर में **500** होटल संचालित करना है। इसके लिए, वे विशेष रूप से टियर II, III, और IV शहरों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
छोटे शहरों पर फोकस
Radisson Hotel Group फिलहाल भारत के 142 शहरों में 86 प्रॉपर्टीज का संचालन कर रही है। कंपनी के पास पहले से ही 98 और होटलों का डेवलपमेंट पाइपलाइन है। इस विस्तार योजना के तहत, ग्रुप अब बड़े महानगरों के बजाय उभरते हुए टियर II, III, और IV शहरों की ओर बढ़ रहा है। कंपनी का मानना है कि इन छोटे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, औद्योगिक विकास और डोमेस्टिक टूरिज्म (घरेलू पर्यटन) में वृद्धि के कारण जबरदस्त संभावनाएं हैं। राजकोट, जमशेदपुर, नाथद्वारा और प्रयागराज जैसे शहरों में नए होटल खोलने की योजना है।
एसेट-लाइट स्ट्रैटेजी
Radisson Hotel Group अपनी विस्तार योजना को 'एसेट-लाइट' मॉडल पर आधारित रख रही है। इसका मतलब है कि कंपनी सीधे प्रॉपर्टी खरीदने या बनाने के बजाय मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स पर ज्यादा निर्भर रहेगी। इस मॉडल में, Radisson प्रॉपर्टी मालिकों के लिए होटल का प्रबंधन करेगी, जिससे उसे जमीन और निर्माण पर भारी निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा स्वतंत्र होटलों को Radisson ब्रांड के तहत री-ब्रांड करना भी इस रणनीति का एक अहम हिस्सा है। इससे कंपनी तेजी से अपने पोर्टफोलियो में कमरे जोड़ पाएगी और प्रॉपर्टी मालिकों को ब्रांड पहचान और बुकिंग नेटवर्क का फायदा मिलेगा।
भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की मजबूती
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और यात्रा लागत में वृद्धि के बावजूद, भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर मजबूत डोमेस्टिक डिमांड के कारण सुरक्षित दिख रहा है। कंपनी के मैनेजमेंट के अनुसार, भारत में कॉर्पोरेट और लग्जरी ट्रैवल की मांग सामान्य हो रही है। हालांकि, इस सेक्टर को अभी भी सरकारी नीतियों जैसे कि होटलों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना और सिंगल-विंडो अप्रूवल प्रक्रियाओं को तेज करने की जरूरत है। ओडिशा, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे वहां हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता बढ़ रही है।
भविष्य की राह
निवेशकों और उद्योग पर्यवेक्षकों के लिए मुख्य चुनौती यह देखना होगी कि 98 होटलों के डेवलपमेंट पाइपलाइन में से कितने असल में 2030 तक ऑपरेशनल हो पाते हैं। एसेट-लाइट स्ट्रैटेजी से वित्तीय जोखिम कम होता है, लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अलग-अलग क्षेत्रीय बाजारों में सर्विस क्वालिटी कैसे बनाए रखती है और टियर III व IV शहरों में मांग नए कमरे के इन्वेंट्री के साथ कैसे बढ़ती है।
