NCLT का बड़ा फैसला: Rajesh Business & Leisure Hotels बिका, लेनदारों को ₹1,345 Cr की देनदारी पर **65%** से ज़्यादा का झटका!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NCLT का बड़ा फैसला: Rajesh Business & Leisure Hotels बिका, लेनदारों को ₹1,345 Cr की देनदारी पर **65%** से ज़्यादा का झटका!
Overview

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने राजेश बिजनेस एंड लीजर होटल्स (Rajesh Business & Leisure Hotels) के लिए एक समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत, रेयर एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (Rare ARC) और चेक-इन होटल्स (Check-Inn Hotels) के कंसोर्टियम ने इस संकटग्रस्त कंपनी का अधिग्रहण कर लिया है। यह डील लेनदारों के लिए बड़ी राहत तो है, लेकिन उन्हें अपनी **₹1,345 करोड़** से ज़्यादा की देनदारी पर **65%** से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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इस डील से लेनदारों को बड़ा झटका लगने वाला है। NCLT की मंजूरी के बाद, ₹730 करोड़ की वैल्यूएशन वाली इस होटल बिज़नेस की ₹1,345 करोड़ से ज़्यादा की देनदारियों पर लेनदारों को 65% से भी ज़्यादा का 'हेयरकट' (haircut) लेना होगा। इसका सीधा मतलब है कि उन्हें अपनी कुल देनदारी का सिर्फ 54% ही वापस मिल पाएगा।

सिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के तौर पर ₹461 करोड़ मिलेंगे। यह डील भारत में इंसॉल्वेंसी (insolvency) की प्रक्रिया के तहत डिस्ट्रेस्ड एसेट्स (distressed assets) को सुलझाने के ट्रेंड को दिखाती है, जहाँ अक्सर रिकवरी वैल्यू मूल कर्ज से काफी कम होती है।

यह अधिग्रहण रेयर एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (Rare ARC) और श्री नमन ग्रुप (Shree Naman Group) की इकाई चेक-इन होटल्स (Check-Inn Hotels) के कंसोर्टियम ने किया है। Rare ARC एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी है, जबकि श्री नमन ग्रुप एक रियल एस्टेट डेवलपर है।

राजेश बिजनेस एंड लीजर होटल्स के लिए यह रेज़ोल्यूशन प्रोसेस अप्रैल 2022 में शुरू हुआ था, जब ICICI बैंक ने ₹311 करोड़ के डिफॉल्ट पर NCLT में याचिका दायर की थी। इस प्रक्रिया में NCLT और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) द्वारा कई बार रिजेक्शन और रिमांड भी शामिल थे। आखिरकार, NCLT मुंबई बेंच ने 24 अप्रैल, 2026 को इस प्लान को मंजूरी दी, जिस पर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) का एकमत समर्थन था।

IBC के तहत हाल के ट्रेंड्स के मुताबिक, रिकवरी रेट करीब 30-33% रहा है, जहाँ लेनदारों को अक्सर 70% तक का हेयरकट झेलना पड़ता है। इस मामले में 54% की रिकवरी इन ट्रेंड्स के अनुरूप है। कुल मिलाकर, लेनदारों को ₹615 करोड़ से ज़्यादा की राशि राइट-ऑफ (write-off) करनी पड़ सकती है।

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर हालिया रिकवरी के संकेतों के बावजूद, आर्थिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के प्रति संवेदनशील है, जो एक्वायर्ड प्रॉपर्टीज़ की भविष्य की कमाई को प्रभावित कर सकता है। यह डील भारत के डिस्ट्रेस्ड हॉस्पिटैलिटी मार्केट में चल रहे कंसॉलिडेशन (consolidation) को दर्शाती है, जहाँ ARC और रियल एस्टेट डेवलपर्स प्रॉपर्टीज़ को भारी डिस्काउंट पर खरीदने के लिए NCLT फ्रेमवर्क का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं।

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