मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के कारण Manipur का टूरिज्म सेक्टर भारी गिरावट का सामना कर रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार अब होमस्टे और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों पर जोर दे रही है।
पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य Manipur इस समय टूरिज्म सेक्टर में भारी गिरावट से जूझ रहा है। मई 2023 से पहले राज्य तेजी से एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा था, जहाँ सालाना लगभग 1.75 लाख पर्यटक आते थे। लेकिन जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से सैलानियों की संख्या में भारी कमी आई है, जिससे स्थानीय कारोबारियों की कमाई का जरिया भी प्रभावित हुआ है।
अन्य राज्यों से तुलना और चुनौतियां
पूर्वोत्तर के अन्य पड़ोसी राज्यों की स्थिति देखें तो Manipur की चुनौती और स्पष्ट हो जाती है। जहाँ अन्य राज्यों में शांति के चलते सालाना 8 लाख से 17 लाख तक पर्यटक पहुँच रहे हैं, वहीं Manipur में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर्यटन की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विकास के लिए स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण आधार है।
सरकार की नई पहल: 'होमस्टे'
इस संकट से उबरने के लिए मणिपुर सरकार अब कम्युनिटी-बेस्ड हॉस्पिटैलिटी मॉडल अपना रही है। सरकार ने 'होमस्टे प्रोग्राम' को प्रमोट करने का फैसला किया है ताकि बड़े होटलों के निर्माण के बिना ही स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिल सके और सैलानियों के लिए रुकने की व्यवस्था हो सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यापक सुधार किए बिना पर्यटकों का भरोसा जीतना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
अब सेक्टर की रिकवरी पूरी तरह से राज्य में सामान्य स्थिति की बहाली पर टिकी है। आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और होमस्टे पॉलिसी का सफल क्रियान्वयन ही इस सेक्टर में जान फूंकने का काम करेगा।
