इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली पर्यटकों की राह
मनाली का पर्यटन क्षेत्र जबरदस्त रिकवरी कर रहा है। अच्छे मौसम और 'अटल टनल' जैसे शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। होटल 70% से 80% तक ऑक्यूपाइड हैं और उम्मीद है कि यह सीजन मई और जून तक रिकॉर्ड तोड़ कलेक्शन करेगा। 2020 में बनकर तैयार हुई 'अटल टनल' ने स्पीति और लाहौल घाटी का सफर बेहद आसान कर दिया है। पहले जहां रोहतांग पास की मौसमी बंदिशों के कारण इन इलाकों तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब साल भर आवाजाही संभव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'अटल टनल' के खुलने के बाद लाहौल-स्पीति में पर्यटकों की संख्या में 600% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है। रोहतांग पास पर ट्रैफिक कम होने से अब इसके चरणबद्ध तरीके से फिर से खुलने की मांग जोर पकड़ रही है, खासकर तब जब इस पास पर पहले प्रदूषण के कारण रोक लगाई गई थी। पर्यटक खुशनुमा मौसम और मनाली की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद ले रहे हैं, कुछ तो मई में भी बर्फबारी और बारिश का अनुभव कर रहे हैं। यह सब इंफ्रास्ट्रक्चरल सुधारों का नतीजा है, जिसने पर्यटकों के अनुभव को कई गुना बेहतर बनाया है।
राष्ट्रीय रुझानों का मिला सहारा
मनाली में पर्यटन की यह तेजी पूरे भारत के ट्रैवल सेक्टर में दिख रहे सकारात्मक रुझानों के अनुरूप है। महामारी के बाद से घरेलू पर्यटन रिकवरी में सबसे आगे रहा है, जो देश की GDP और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 2023 में, इस सेक्टर ने भारत की GDP में 2019 की तुलना में लगभग 10% अधिक का योगदान दिया। घरेलू खर्च में प्री-पेंडमिक स्तरों से 15% की वृद्धि देखी गई है। अनुमान है कि 2024 में यह सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में 21 ट्रिलियन रुपये से अधिक का योगदान देगा। होटल इंडस्ट्री भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है, प्रमुख बाजारों में 70% के करीब ऑक्यूपेंसी दर और पिछले साल की तुलना में रूम रेट्स में 10-15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सब घरेलू अवकाश यात्राओं की बदौलत संभव हुआ है। 'राडिसन होटल ग्रुप' जैसी बड़ी होटल चेन भारत में विस्तार कर रही हैं और 2026 के अंत तक 157-160 नए होटल खोलने की योजना बना रही हैं, जो बाजार में उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। यह विस्तार ज्यादातर छोटे शहरों में भी मजबूत घरेलू मांग से प्रेरित है।
पर्यावरण और आर्थिक जोखिमों की भी है चिंता
हालांकि, मनाली के पर्यटन क्षेत्र को कुछ गंभीर जोखिमों का भी सामना करना पड़ रहा है। रोहतांग पास को फिर से खोलने का विचार आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव भी हो सकते हैं। पिछले पर्यावरणीय फैसलों में अनियंत्रित पर्यटन से प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान की बात कही गई थी। अगर सख्त पर्यावरणीय नियंत्रणों के बिना इसे खोला गया, तो ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं और स्थायी पारिस्थितिक क्षति हो सकती है। स्थानीय लोग यह भी चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि कड़े संरक्षण नियम उनकी आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र अच्छे मौसम पर बहुत अधिक निर्भर है, जो इसे जलवायु परिवर्तन और मानसून की बाधाओं जैसे भूस्खलन और सड़कों के बंद होने के प्रति संवेदनशील बनाता है। यह सब सुरक्षा और पहुंच को प्रभावित करता है। यह सेक्टर व्यापक आर्थिक मंदी या मुद्रास्फीति से भी प्रभावित हो सकता है, जो लोगों के खर्च करने की क्षमता को कम कर सकता है। अन्य उभरते हिल स्टेशनों से प्रतिस्पर्धा के कारण मनाली को लगातार नवाचार करते रहना होगा।
भविष्य की राह: संतुलन साधने की चुनौती
'अटल टनल' और राष्ट्रीय घरेलू यात्रा बूम के सहारे मनाली के पर्यटन का भविष्य उज्ज्वल दिखता है। रोहतांग पास को प्रबंधित परिस्थितियों में फिर से खोलना अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ई-बाइक ट्रेल्स व फॉरेस्ट बाथिंग जैसी नई पेशकशों की खोज कर रही है, जिसका उद्देश्य अधिक आगंतुकों को आकर्षित करना है। भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए अनुमान सकारात्मक हैं, और घरेलू यात्रा से मजबूत प्रदर्शन जारी रहने की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रकृति के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत करना और इसे स्थायी रूप से प्रबंधित करना, मनाली की दीर्घकालिक अपील और आर्थिक स्वास्थ्य की कुंजी है।
