यह फाइनेंशियल ईयर 2026 'द लीला पैलेस होटल्स एंड रिसॉर्ट्स' के लिए बेहद शानदार रहा। कंपनी ने ₹1527.3 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू और ₹403 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) कमाया है, जो पिछले साल के मुकाबले आठ गुना ज्यादा है। RevPAR (Revenue Per Available Room) में जबरदस्त ग्रोथ और एक्सपैंशन (Expansion) की वजह से लीला ब्रांड ने भारत के तेजी से बढ़ते हॉस्पिटैलिटी मार्केट में अपनी मजबूत जगह बनाई है।
खासकर, चौथी तिमाही में ऑपरेटिंग रेवेन्यू 12% बढ़कर ₹484.4 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 46% उछलकर ₹172 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन भी करीब 55% रहा, जो कुशल संचालन का संकेत देता है। अपने होटलों में RevPAR 6% बढ़कर ₹23,028 हुआ, और औसत डेली रेट 15% बढ़कर ₹32,059 पर पहुंच गया। यह लग्जरी सेगमेंट के RevPAR ग्रोथ से 2.3 गुना तेज था। कंपनी ने 4 नए प्रॉपर्टीज जोड़कर अपने विस्तार को और बढ़ाया है। इसके अलावा, कंपनी ने अपना कर्ज काफी कम किया है, जो FY25 में ₹2568 करोड़ से घटकर FY26 में ₹1271 करोड़ हो गया। नेट डेट टू EBITDA रेश्यो भी 3.7x से सुधरकर 1.6x हो गया।
लीला ब्रांड की यह शानदार परफॉर्मेंस इसके शेयर बाजार में लिस्टेड पेरेंट कंपनी Hotel Leelaventure Ltd (HLVLTD) के विपरीत तस्वीर पेश करती है। अप्रैल 2026 तक, HLVLTD का मार्केट कैप लगभग ₹558 करोड़ है, लेकिन इसका P/E रेश्यो 130x से ऊपर है, जिसे एक्सपर्ट्स 'बहुत महंगा' या 'जोखिम भरा' बता रहे हैं। यह वैल्यूएशन अन्य बड़े खिलाड़ियों जैसे Indian Hotels Company Ltd (IHCL) से काफी अलग है, जिसका मार्केट कैप ₹92,000 करोड़ से ज्यादा है और P/E रेश्यो काफी स्थिर है। IHCL, जो ताज होटल्स का मालिक है, कैपिटल-लाइट ग्रोथ पर फोकस कर रहा है और उसने FY25 में ₹85.63 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया था। वहीं, ITC Hotels ने भी Q3 FY26 में ₹1,231 करोड़ का रेवेन्यू और ₹307 करोड़ का PAT दर्ज किया था, जो उनकी बड़ी पोर्टफोलियो और एसेट-राइट स्ट्रैटेजी का नतीजा है।
HLVLTD की अपनी स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों में कमजोरी साफ दिखती है। Q3 FY26 में, कंपनी ने ₹60.90 करोड़ की रिकॉर्ड नेट सेल्स के बावजूद ₹16.87 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया। ऑपरेटिंग मार्जिन -37.21% पर था, जो परिचालन में बड़ी खामियों को उजागर करता है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि कंपनी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ चल रहे मुंबई होटल लीज रेंटल विवादों के कारण ₹97,171 लाख (यानी ₹971.71 करोड़) की भारी देनदारी का सामना कर रही है। इन बड़े और पुराने कानूनी मामलों के नतीजों पर ही कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (लगातार चालू रहने) की स्थिति निर्भर करती है, जो IHCL जैसी मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों से बिल्कुल अलग है।
कुल मिलाकर, लीला ब्रांड का विस्तार और मजबूत प्रदर्शन भारत के लग्जरी ट्रैवल मार्केट से फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है। कंपनी के कर्ज में कमी और स्पष्ट ग्रोथ प्लान इसे आगे बढ़ा सकते हैं। हालांकि, पेरेंट कंपनी HLVLTD का अत्यधिक वैल्यूएशन और अनसुलझे वित्तीय व कानूनी मुद्दे महत्वपूर्ण जोखिम और अस्थिरता पैदा करते हैं। निवेशकों को ब्रांड की सफलता को पेरेंट कंपनी की वित्तीय कमजोरियों और ग्लोबल अनिश्चितताओं के मुकाबले तौलना होगा, जबकि घरेलू मांग कुछ स्थिरता प्रदान करती है।
