केरल सरकार ने साल 2027 तक हर साल 2 लाख अरब पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति बनाई है, जिससे सालाना **₹5,000 करोड़** की कमाई का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम ऑफ-सीजन में भी होटल और टूरिज्म बिजनेस के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है।
केरल सरकार ने अरब देशों के ट्रेवल मार्केट पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक आक्रामक योजना तैयार की है। हाल ही में कोच्चि में आयोजित 'Indo-Arab Connect 2026' समिट के बाद सरकार ने अगले 5 सालों में ₹25,000 करोड़ के कुल आर्थिक प्रभाव का लक्ष्य रखा है।
हाई-वैल्यू टूरिज्म पर फोकस
इस रणनीति के पीछे सबसे बड़ा कारण अरब पर्यटकों का खर्च करने का तरीका है। डेटा के अनुसार, अरब देशों से आने वाले एक पर्यटक का औसत दैनिक खर्च करीब $3,000 तक होता है, जबकि यूरोप से आने वाले पर्यटकों का खर्च $550 से $700 के बीच रहता है। इस प्रीमियम सेगमेंट को टारगेट करके केरल अपने लक्जरी रिसॉर्ट्स, वेलनेस रिट्रीट और मेडिकल टूरिज्म सेक्टर को नई रफ्तार देना चाहता है।
ऑफ-सीजन की चुनौती होगी खत्म
केरल के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि मिडिल ईस्ट से आने वाले पर्यटक मानसून के महीनों यानी जून से सितंबर के दौरान भी सक्रिय रहते हैं। इससे राज्य के होटल और सर्विस प्रोवाइडर्स को ऑफ-सीजन के दौरान भी अपनी ऑक्यूपेंसी रेट और कैश फ्लो को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
रिस्क और चुनौतियां
विकास की इस राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। मिडिल ईस्ट में जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता पर्यटन प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर—जैसे ट्रांसपोर्ट, लक्जरी आवास और मेडिकल सुविधाओं—को इन हाई-वैल्यू यात्रियों की उम्मीदों के अनुरूप अपग्रेड करना एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशक अब आने वाले समय में ऑक्यूपेंसी डेटा और रेवेन्यू पर उपलब्ध कमरा (RevPAR) के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।
