MHRIL Share: विजय केडिया का बड़ा दांव! यूरोप के बोझ को हटाएं, इंडिया के बिज़नेस को दें पहचान

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AuthorAditya Rao|Published at:
MHRIL Share: विजय केडिया का बड़ा दांव! यूरोप के बोझ को हटाएं, इंडिया के बिज़नेस को दें पहचान
Overview

दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने Mahindra Holidays & Resorts India Ltd. (MHRIL) के स्ट्रेटेजिक रिव्यू की जोरदार मांग की है। केडिया का कहना है कि कंपनी के यूरोप स्थित हॉलिडे क्लब (Holiday Club) बिज़नेस के खराब प्रदर्शन के कारण MHRIL की असली वैल्यूएशन छिपी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया है कि यूरोप की यूनिट को अलग, रीस्ट्रक्चर या बेच देना चाहिए ताकि भारत के मजबूत बिज़नेस को उसकी असली पहचान मिल सके।

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केडिया की MHRIL रिव्यू की मांग

बाजार के जाने-माने निवेशक विजय केडिया ने आनंद महिंद्रा को एक सार्वजनिक पत्र के ज़रिए Mahindra Holidays & Resorts India Ltd. (MHRIL) के स्ट्रैटेजिक रिव्यू के लिए आग्रह किया है। केडिया का तर्क है कि भारत के बढ़ते टूरिज्म मार्केट में MHRIL की जबरदस्त क्षमता है, लेकिन यूरोप स्थित हॉलिडे क्लब रिसॉर्ट्स (Holiday Club Resorts) यूनिट की लगातार समस्याओं के चलते कंपनी की असली वैल्यूएशन दब रही है। उन्होंने सुझाव दिया है कि यूरोप की यूनिट को रिंग-फेंसिंग, रीस्ट्रक्चरिंग या बेचने जैसे विकल्प पर विचार किया जाए, ताकि भारत के मजबूत बिज़नेस को स्वतंत्र रूप से उसकी काबिलियत के हिसाब से वैल्यू मिल सके। एक बड़े शेयरहोल्डर की ओर से यह कदम कंपनी की आंतरिक संरचना और भविष्य की रणनीति पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

इंडिया का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बूम पर

केडिया का यह हस्तक्षेप भारत की मौजूदा आर्थिक हकीकत से पूरी तरह मेल खाता है। देश का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर इस समय तेजी से बढ़ रहा है। अनुमानों के मुताबिक, भारत 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, और इस दौरान हॉस्पिटैलिटी पर होने वाले खर्च में 19% सालाना की जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिल सकती है। ब्रांडेड लेजर हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट के FY30 तक 4 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स के अनुसार, होटल सेक्टर FY26 में 9-12% की दर से बढ़ सकता है। खास बात यह है कि प्रीमियम सेगमेंट में डिमांड सप्लाई से आगे निकलने की उम्मीद है, जो ऑक्यूपेंसी और कीमतों को सहारा देगा। इतने पॉजिटिव माहौल के बावजूद, MHRIL का स्टॉक इस साल अब तक 26% और पिछले एक साल में करीब 36% गिर चुका है, और यह अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹220.30 के करीब कारोबार कर रहा है।

यूरोप यूनिट का फाइनेंशियल 'ड्रैग'

कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे विजय केडिया की ओर से उठाए गए मुद्दे की पुष्टि करते हैं। MHRIL के स्टैंडअलोन इंडिया ऑपरेशंस की कुल आय FY26 में 4.4% बढ़कर ₹1,613.3 करोड़ दर्ज की गई, जबकि EBITDA 20.5% बढ़कर ₹592.8 करोड़ रहा। इसके विपरीत, कंसोलिडेटेड आंकड़ों में हॉलिडे क्लब रिसॉर्ट्स की आय FY26 में घटकर EUR 137.1 मिलियन पर आ गई। इसका EBITDA EUR 1.2 मिलियन निगेटिव रहा और PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) लॉस बढ़कर EUR 6.8 मिलियन हो गया। केडिया का मानना है कि यूरोप यूनिट का यह 'ड्रैग' (वित्तीय बोझ) ही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से मार्केट भारत के बिज़नेस की असली ताकत को पहचानने में नाकाम हो रहा है।

वैल्यूएशन गैप: इंडिया बनाम पीयर्स

फिलहाल, MHRIL का शेयर अपने पिछले 12 महीनों के नतीजों (TTM earnings) के आधार पर लगभग 66.5x के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन ₹4,646 करोड़ के मार्केट कैप पर आधारित है। इसकी तुलना में, सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे The Indian Hotels Company (IHCL) 41.3x और EIH Ltd (Oberoi Hotels) 32.8x के P/E रेश्यो पर कारोबार कर रही हैं। यह तुलना बताती है कि MHRIL के मजबूत भारतीय ऑपरेशंस के बावजूद, इसकी ओवरऑल वैल्यूएशन शायद इंडस्ट्री के स्टैंडर्ड से थोड़ी ज्यादा है, जो कहीं न कहीं यूरोप यूनिट के प्रदर्शन से प्रभावित है।

कर्ज और कमजोरी की चिंताएं

कंपनी के फाइनेंस को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, खासकर इसके कर्ज (debt) को लेकर। मार्च 2026 तक, कंपनी की एंटरप्राइज वैल्यू उसके मार्केट कैप से ₹26.77 बिलियन अधिक थी, जो कर्ज के दबाव को दर्शाता है। यूरोप की हॉलिडे क्लब रिसॉर्ट्स सेगमेंट से लगातार आ रहे नुकसान भी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। शेयर में लगातार कमजोरी देखी जा रही है, जो अपने 52-हफ्ते के लो के पास बना हुआ है और इसने कई अवधियों में ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स से काफी खराब प्रदर्शन किया है।

MHRIL का आउटलुक

शेयर पर मौजूदा दबाव के बावजूद, भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के फंडामेंटल्स काफी मजबूत बने हुए हैं। FY26 के लिए इस सेक्टर में रेवेन्यू ग्रोथ 6-8% रहने का अनुमान है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि MHRIL के PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) में FY27 तक 15-20% तक की ग्रोथ आ सकती है। हालांकि, यह ग्रोथ कंपनी के मैनेजमेंट द्वारा लिए जाने वाले स्ट्रैटेजिक फैसलों और यूरोप के अंडरपरफॉर्मिंग सेगमेंट को सुधारने की क्षमता पर निर्भर करेगी। मजबूत घरेलू टूरिज्म ट्रेंड का फायदा उठाना और यूरोप के बिज़नेस को पटरी पर लाना, शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाने और मौजूदा वैल्यूएशन व भविष्य की क्षमता के बीच के अंतर को पाटने के लिए सबसे अहम होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.