कर्नाटक सरकार ने दिल्ली के 'भारत मंडपम' की तर्ज पर बेंगलुरु में एक विशाल कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना बनाई है। साथ ही, नई 'Coastal Malnad Karnataka Tourism Policy-2026' के तहत टूरिज्म प्रोजेक्ट्स को अब 'इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर' का दर्जा दिया जाएगा, जिससे परमिट प्रक्रिया आसान होगी।
बड़े प्रोजेक्ट्स की तैयारी
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु में एक वर्ल्ड-क्लास कन्वेंशन सेंटर विकसित करने का खाका तैयार किया है, जिसे 'Karnataka Mandapam' नाम दिए जाने की चर्चा है। इस प्रोजेक्ट के लिए जक्कुर (Jakkur), मैसूर लैम्प्स (Mysuru Lamps) और एनजीईएफ (NGEF) जैसी साइटों पर विचार किया जा रहा है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बड़े आयोजनों को बेंगलुरु की ओर आकर्षित करना है।
पॉलिसी में बड़ा बदलाव
राज्य सरकार ने 'Coastal Malnad Karnataka Tourism Policy-2026' को मंजूरी दे दी है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स को 'इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर' माना जाएगा। इसके तहत कंपनियों को बिजली दरों में छूट, प्रॉपर्टी टैक्स में कटौती और सबसे महत्वपूर्ण—परमिट की प्रक्रिया को केवल 2 से 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
PPP मॉडल पर दांव
सरकार इस पूरे डेवलपमेंट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आगे बढ़ाएगी। इसमें स्काई डेक और 'Mangaluru Eye' टावर जैसे हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और हॉस्पिटैलिटी कंपनियों के लिए यह कॉन्ट्रैक्ट्स का एक नया रास्ता खोल सकता है।
चुनौतियां और सावधानियां
हालांकि, इन्वेस्टर्स को रेगुलेटरी रिस्क पर नजर रखनी चाहिए। कोस्टल और वेस्टर्न घाट (Western Ghats) जैसे संवेदनशील इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अक्सर National Green Tribunal और अन्य पर्यावरण नियामकों की कड़ी जांच का सामना करना पड़ता है। सरकार 'Coastal Regulation Zone' (CRZ) नियमों में बदलाव की कोशिश कर रही है ताकि उन्हें केरल और गोवा की तर्ज पर लाया जा सके। प्रोजेक्ट्स की सफलता पूरी तरह से केंद्र सरकार की मंजूरी और एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस पर टिकी है। निवेशकों को टेंडर जारी होने की गति और सरकारी परमिट के समय पर खास नजर रखनी चाहिए।
