Kamat Hotels Share Price: होटल कंपनी के मुनाफे में 39% की भारी गिरावट, ऑडिटर्स की चेतावनी से मचा हड़कंप

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AuthorAditya Rao|Published at:
Kamat Hotels Share Price: होटल कंपनी के मुनाफे में 39% की भारी गिरावट, ऑडिटर्स की चेतावनी से मचा हड़कंप
Overview

Kamat Hotels India ने Q3 FY26 के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (PAT) में **39%** की भारी गिरावट आई है। इसके बावजूद, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) लगभग सपाट रहा। कंसोलिडेटेड आधार पर भी मुनाफे में **27%** की कमी देखी गई।

नतीजों पर गिरी चिंता के बादल: Kamat Hotels की स्टैंडअलोन प्रॉफिट में 39% की सेंध

Kamat Hotels (India) Limited के तिमाही नतीजों ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। स्टैंडअलोन आधार पर, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के ₹7,937.10 लाख की तुलना में लगभग सपाट रहकर ₹7,906.47 लाख पर रहा। लेकिन, मुनाफे (PAT) में भारी गिरावट आई, जो 39% घटकर ₹1,523.80 लाख रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹2,514.70 लाख था। इस वजह से स्टैंडअलोन EPS भी घटकर ₹5.02 रह गया, जो पहले ₹8.29 था।

वहीं, कंसोलिडेटेड तौर पर कंपनी का रेवेन्यू 12% बढ़कर ₹11,773.84 लाख हो गया। मगर, मुनाफा 27% लुढ़ककर ₹1,906.06 लाख पर आ गया। कंसोलिडेटेड EPS भी घटकर ₹6.28 हो गया। चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों (दिसंबर 2025 तक) में भी स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड, दोनों ही मोर्चों पर मुनाफे में ऐसी ही गिरावट देखने को मिली है।

तिमाही नतीजों में लेबर कोड से जुड़े कुछ एक्सेप्शनल आइटम्स का भी असर दिखा, जिसमें स्टैंडअलोन PAT पर ₹307.61 लाख और कंसोलिडेटेड PAT पर ₹367.93 लाख का प्रभाव पड़ा। हालांकि, यह मुनाफे में आई कुल गिरावट की पूरी कहानी नहीं बताता।

🚩 ऑडिटर्स की गंभीर चिंताएं: ED जांच और 'गोइंग कंसर्न' का खतरा

नतीजों से भी ज़्यादा चिंता की बात ऑडिटर्स की रिपोर्ट में सामने आई है। ऑडिटर्स ने 'Emphasis of Matter' सेक्शन में कंपनी की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कई अहम मुद्दों पर ध्यान दिलाया है:

  • ED की जांच: कंपनी एक प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) की जांच के दायरे में है, जो एक बड़ा कानूनी और वित्तीय जोखिम है।
  • लीज (Lease) की अनिश्चितता: लोटस रिसॉर्ट - कोनार्क का लीज फरवरी 2024 में खत्म हो रहा है (हालांकि सितंबर 2025 तक एक्सटेंशन मिला है)। कंपनी लंबी अवधि के एक्सटेंशन की कोशिश कर रही है।
  • लीज रेंट विवाद: एक सब्सिडियरी (OHPPL) ₹2,121.00 लाख के बड़े लीज रेंट विवाद में फंसी हुई है।
  • सब्सिडियरी की वित्तीय स्थिति: सब्सिडियरी OHPPL और MPPL की वित्तीय अनिश्चितताओं को भी नोट किया गया है।

इन गंभीर मुद्दों के चलते, ऑडिटर्स ने वित्तीय नतीजों को 'गोइंग कंसर्न' (going concern) आधार पर तैयार किया है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी के लगातार चलते रहने की क्षमता पर गंभीर संदेह है, जब तक कि इन मसलों का संतोषजनक समाधान नहीं निकल जाता। मैनेजमेंट की ओर से भविष्य को लेकर कोई गाइडेंस (guidance) नहीं दिया गया है, जिससे निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है।

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