भारत का MICE (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेस और एग्जीबिशन) सेक्टर अगले 3 से 5 सालों में **12-14%** सालाना की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। कॉर्पोरेट इवेंट्स और डेस्टिनेशन वेडिंग की ज़बरदस्त डिमांड इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, फ्यूल की बढ़ती कीमतें और इंटरनेशनल वीज़ा की चुनौतियाँ निवेशकों के लिए चिंता का सबब बन सकती हैं।
MICE और शादियों की डिमांड बढ़ा रही सेक्टर को रफ्तार
मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेस और एग्जीबिशन (MICE) सेक्टर भारत में लगातार तरक्की कर रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगले 3 से 5 सालों में यह सेक्टर 12-14% की सालाना दर से बढ़ेगा। यह अनुमान नेटवर्क ऑफ इंडियन MICE एसोसिएशन (NIMA) ने मुंबई में हुए ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (TTF) में साझा किया।
इस ग्रोथ के पीछे दो मुख्य वजहें हैं। एक तरफ, कॉर्पोरेट MICE इवेंट्स (बिजनेस कॉन्फ्रेंस और इंसेटिव ट्रैवल) 10-15% सालाना के हिसाब से बढ़ रहे हैं। वहीं, डेस्टिनेशन वेडिंग मार्केट 15-20% की और भी तेज रफ्तार से एक्सपैंड हो रहा है। इस डबल इंजन की ग्रोथ से होटल, कॉन्फ्रेंस फैसिलिटी और ट्रैवल सर्विसेज़ की डिमांड लगातार बढ़ने की उम्मीद है।
टियर II और III शहरों का बढ़ता क्रेज़
दिल्ली NCR, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहर भले ही MICE और शादियों के लिए मुख्य केंद्र बने हुए हैं, लेकिन अब टियर II और III शहरों की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। गोवा, उदयपुर, जयपुर, कोच्चि, वाराणसी और इंदौर जैसे शहर कॉन्फ्रेंस और शादियों के लिए पसंद किए जा रहे हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सांस्कृतिक आकर्षण और मेट्रो शहरों की तुलना में कम लागत इसे खास बना रही है। इससे होटल ऑपरेटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए नए रेवेन्यू के अवसर खुल रहे हैं।
सेक्टर के सामने चुनौतियाँ
सकारात्मक अनुमानों के बावजूद, इस सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें एयरलाइंस के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं, जिससे डोमेस्टिक और इंटरनेशनल ट्रैवल का खर्च बढ़ रहा है।
इसके अलावा, ग्लोबल वीज़ा से जुड़ी दिक्कतें यात्रियों को यूरोपियन यूनियन और अमेरिका जैसे डेस्टिनेशन्स पर जाने से रोक सकती हैं, जिससे लोग डोमेस्टिक या छोटे इंटरनेशनल ट्रिप्स की ओर मुड़ सकते हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण फ्लाइट्स में देरी और लंबे रूट की वजह से लॉजिस्टिक्स और ट्रैवल इंडस्ट्री के खर्चों में इजाफा हुआ है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को कुछ प्रमुख बातों पर ध्यान देना होगा। इसमें कंपनियों की महंगाई, खासकर फ्यूल की बढ़ती कीमतों से निपटने की क्षमता और टियर II व III शहरों में विस्तार करने की उनकी कैपेसिटी शामिल है। इंडस्ट्री की ओर से बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे कन्वेंशन ब्यूरो) और आसान वीज़ा प्रोसेस के लिए पैरवी भी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए अहम होगी। हॉस्पिटैलिटी फर्मों के लिए रेवेन्यू पर अवेलेबल रूम (RevPAR) और एयरलाइन कपैसिटी यूटिलाइजेशन जैसे मेट्रिक्स सेक्टर की सेहत के महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे।
