भारत का वैकल्पिक आवास (Alternative Accommodation) सेक्टर, जिसमें होमस्टे और सर्विस अपार्टमेंट शामिल हैं, FY29 तक **₹41,500 करोड़** के ग्रॉस बुकिंग वैल्यू तक पहुंचने की राह पर है। छोटे शहरों में बढ़ती मांग और कॉर्पोरेट एडॉप्शन से यह सेक्टर पारंपरिक होटलों को पीछे छोड़ रहा है, लेकिन रेगुलेटरी चुनौतियों पर नजर रखना जरूरी है।
बाजार की रफ्तार और ग्रोथ
वैकल्पिक आवास के क्षेत्र में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। अनुमान है कि यह सेगमेंट सालाना 21.2% की दर से बढ़ रहा है। यात्री अब पारंपरिक होटल के बजाय होमस्टे और सर्विस अपार्टमेंट को तरजीह दे रहे हैं, जो न केवल फ्लेक्सिबल हैं बल्कि किफायती भी हैं। डिजिटल लिस्टिंग के आंकड़ों पर गौर करें तो यह FY23 में 1,02,200 थी, जो FY26 तक 2,15,000 तक पहुंच गई है।
छोटे शहरों में बढ़ती पैठ
यह तेजी अब केवल बड़े टूरिस्ट हब तक सीमित नहीं है। इंदौर, गाजियाबाद और अयोध्या जैसे छोटे शहरों में इन्वेंट्री की भारी उपलब्धता देखी जा रही है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट ट्रैवलर्स भी अब इन विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। FY26 में कुल रूम नाइट्स में कॉर्पोरेट हिस्सा लगभग 19% रहा, क्योंकि कंपनियां ऐसे विकल्प चाहती हैं जहां रहने के साथ-साथ काम करने की जगह भी मिले।
निवेशकों के लिए चेतावनी: रेगुलेटरी रिस्क
तेजी के बीच कुछ गंभीर चुनौतियां भी हैं। सरकारें अब सेफ्टी, शोर-शराबे और स्थानीय हाउसिंग पर पड़ने वाले असर को लेकर सख्त हो रही हैं। गोवा जैसे पर्यटन स्थलों पर अनधिकृत होमस्टे पर पहले ही बहस छिड़ चुकी है।
साथ ही, GST कंप्लायंस को लेकर टैक्स अथॉरिटीज भी सख्त हो रही हैं। अगर भविष्य में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन या फायर सेफ्टी नियमों को और कड़ा किया गया, तो होस्ट्स की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स के मार्जिन पर पड़ सकता है।
मार्केट कॉम्पिटिशन
जहां एक तरफ Indian Hotels Company (IHCL) और Lemon Tree Hotels जैसे पारंपरिक होटल चेन अपनी ब्रांड वैल्यू पर जोर दे रहे हैं, वहीं MakeMyTrip और EaseMyTrip जैसे प्लेटफॉर्म्स इस बढ़ते वॉल्यूम का फायदा उठाने की कोशिश में हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये कंपनियां कैसे रेगुलेटरी अनुपालन और आक्रामक विस्तार के बीच संतुलन बनाती हैं।
