कन्सर्ट का बूम: टूरिज्म को लगी नई उड़ान
लाइव एंटरटेनमेंट और ट्रैवल का मेल अब भारत के छोटे शहरों को बड़ी पहचान दिला रहा है। लोग अब सिर्फ घूमने-फिरने नहीं, बल्कि खास अनुभवों के लिए यात्रा कर रहे हैं, और कन्सर्ट इसमें सबसे आगे हैं। 2024-25 में 5 लाख के करीब फैंस सिर्फ म्यूजिक कन्सर्ट के लिए एक शहर से दूसरे शहर गए हैं। यह 'कन्सर्ट टूरिज्म' चंडीगढ़, लखनऊ और शिलांग जैसे टियर II शहरों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जो अब बड़े नेशनल टूर का अहम हिस्सा बन गए हैं। हर कन्सर्ट वीकेंड पर इन शहरों की इकोनॉमी में ₹5 करोड़ से ₹15 करोड़ तक का इजाफा हो रहा है। यह 'ऑरेंज इकोनॉमी' (Orange Economy) का बेहतरीन उदाहरण है, जहां क्रिएटिव इंडस्ट्रीज टूरिज्म और जॉब्स को बढ़ावा दे रही हैं।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की नई चुनौती
इस इवेंट-ड्रिवन डिमांड (Event-driven demand) ने होटल इंडस्ट्री के लिए बड़े मौके तो खोले हैं, लेकिन साथ ही कुछ परिचालन संबंधी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। कन्सर्ट के दिनों में होटलों की ऑक्यूपेंसी 60% से 80% तक पहुंच जाती है। खास बात यह है कि ये कन्सर्ट गोअर्स (Concert-goers) अक्सर प्राइस-सेंसिटिव (Price-sensitive) नहीं होते, जिससे होटलों को अच्छी रेवेन्यू (Revenue) मिल रही है। हालांकि, इस अचानक और भारी मांग को पूरा करने के लिए होटलों को डायनामिक प्राइसिंग (Dynamic pricing), फ्लेक्सिबल इन्वेंट्री मैनेजमेंट (Flexible inventory management) और स्पेशल गेस्ट एक्सपीरियंस (Special guest experience) जैसे तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। कन्सर्ट वेन्यू (Venue) के पास होना भी अब लोकेशन चुनने का एक अहम फैक्टर बन गया है।
टियर II शहरों के होटलों पर दबाव
टियर II शहरों में इस तरह की अचानक बढ़ी हुई मांग से इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर भी दबाव आ रहा है। ट्रांसपोर्टेशन (Transportation) और फूड सर्विसेज (Food services) जैसी स्थानीय सुविधाएं कम पड़ सकती हैं, जिससे सर्विस क्वालिटी (Service quality) पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, सिर्फ इवेंट्स पर निर्भरता रेवेन्यू में अस्थिरता ला सकती है। बड़े शहरों के विपरीत, जहां टूरिज्म के कई स्रोत होते हैं, टियर II शहर इवेंट्स रद्द होने या इकोनॉमी में मंदी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इन बदलती मांगों को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड (Infrastructure upgrade) और ऑपरेशनल कैपेसिटी (Operational capacity) बढ़ाने में बड़ा निवेश चाहिए। ऐसे में, मैनेजमेंट को यह ध्यान रखना होगा कि इवेंट न होने के समय में खाली पड़े कैपेसिटी (Capacity) पर ज्यादा खर्च न हो जाए।
भविष्य की राह
लाइव एंटरटेनमेंट और डोमेस्टिक टूरिज्म (Domestic tourism) का रिश्ता और मजबूत होने की उम्मीद है, जिसमें टियर II शहर अहम भूमिका निभाएंगे। सरकारी प्रोजेक्ट्स जैसे 'स्वदेश दर्शन 2.0' (Swadesh Darshan 2.0) और टूरिज्म मिनिस्ट्री (Ministry of Tourism) की पहलें इस सेक्टर को बढ़ावा दे रही हैं। आने वाले समय में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को इन अवसरों का फायदा उठाते हुए अनिश्चित रेवेन्यू (Unpredictable revenue) और लॉजिस्टिकल कॉम्प्लेक्सिटीज (Logistical complexities) से निपटना होगा।
