फ्यूल की मार और यात्रियों की चिंता
हाल ही में जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हवाई किरायों पर पड़ा है। अप्रैल के महीने में कई प्रमुख रूट्स पर किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई। उदाहरण के लिए, मुंबई से कुआलालंपुर का किराया 110% बढ़कर ₹45,000-₹50,000 तक पहुंच गया, वहीं दिल्ली से हो ची मिन्ह का किराया 58% और बेंगलुरु से सिंगापुर का किराया 33% बढ़ा है।
यह स्थिति यात्रियों की कमर तोड़ रही है। ट्रैवल एजेंसियां बता रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बुकिंग कैंसल कराने वालों की संख्या काफी बढ़ गई है। जब ₹30,000 का किराया अचानक बढ़कर ₹45,000-₹50,000 तक पहुंच जाता है, तो लोग अपनी यात्रा योजनाओं पर दोबारा विचार करने पर मजबूर हो जाते हैं। बढ़ती परिचालन लागत (operational costs) और मजबूत डॉलर के कारण पैकेज टूर भी महंगे हो गए हैं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी रेट बढ़ रहे हैं, जिससे घरेलू यात्राएं भी प्रभावित हो रही हैं।
एयरलाइंस पर लागत का दबाव
घरेलू उड़ानें 90% से अधिक भरी हुई हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या एयरलाइंस इतनी ऊंची टिकट कीमतें बनाए रख पाएंगी। एयर इंडिया (Air India) जैसी कंपनियां पहले ही फ्यूल सरचार्ज (fuel surcharge) बढ़ा चुकी हैं, जो इंडस्ट्री में बढ़ती लागत से निपटने के लिए एक व्यापक कदम का संकेत है।
इंटरग्लोब एविएशन (InterGlobe Aviation), भारत की सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइन, लगभग 28 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स (forward earnings) पर ट्रेड कर रही है और इसकी मार्केट वैल्यू लगभग $14.4 बिलियन है। कंपनी के शेयर पिछले महीने लगभग 8% बढ़े हैं, लेकिन हाल ही में कुछ अस्थिरता के साथ ₹3,200 के करीब कारोबार कर रहे हैं।
क्रूड ऑयल (crude oil) की कीमतों में 15% की बढ़ोतरी (जो पिछले तिमाही में हुई) के कारण जेट फ्यूल महंगा हुआ है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब ब्रेंट क्रूड (Brent crude) करीब $88 प्रति बैरल पर है। इंटरग्लोब एविएशन के लिए, क्रूड ऑयल में $10 प्रति बैरल की वृद्धि नेट प्रॉफिट (net profit) को 2-3% तक कम कर सकती है। इसके विपरीत, एयर इंडिया अपने पुनर्गठन के बाद FY27 तक मुनाफा कमाने का लक्ष्य रख रही है, जबकि स्पाइसजेट (SpiceJet) कर्ज की चुनौतियों से जूझ रही है।
मांग गिरने का खतरा
हालांकि डोमेस्टिक फ्लाइट्स फुल चल रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय किराए से यह जोखिम साफ है कि ग्राहक यात्रा करना कम कर सकते हैं। इंटरग्लोब एविएशन का बिजनेस फ्लाइट वॉल्यूम पर बहुत निर्भर करता है। यदि टिकटों की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो यह कुल खर्च योग्य यात्रा खर्च (discretionary travel spending) को कम कर सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय और प्रीमियम डोमेस्टिक यात्राएं दोनों प्रभावित होंगी।
आगे का रास्ता
आने वाले हफ्ते यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि पीक समर ट्रैवल सीजन पर इसका पूरा असर क्या पड़ता है। एयरलाइन लीडर्स का कहना है कि फिलहाल मांग बनी हुई है, लेकिन लंबी अवधि तक ऊंची कीमतों के लिए भविष्य की ग्रोथ योजनाओं को एडजस्ट करने की आवश्यकता हो सकती है। एयरलाइंस के सामने एक मुश्किल संतुलन है: बढ़ती लागतों की भरपाई करना और यात्रियों की संख्या बनाए रखना।
एनालिस्ट्स (analysts) इंटरग्लोब एविएशन को लेकर सतर्क रूप से आशावादी हैं, ज्यादातर 'बाय' (Buy) या 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दे रहे हैं। हालांकि, कीमत लक्ष्यों (price targets) में निकट अवधि में सीमित वृद्धि का संकेत मिलता है, क्योंकि लागतों का यात्रा मांग पर असर पड़ने की चिंताएं बनी हुई हैं।