India Tourism: इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रहे विदेशी टूरिस्ट?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Tourism: इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रहे विदेशी टूरिस्ट?

देश में एयरपोर्ट और सड़कों का जाल बिछ चुका है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रही है। डोमेस्टिक टूरिज्म जहां **3 अरब** के रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं विदेशी टूरिस्टों की सुस्त रफ्तार हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

भारत इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के दौर से गुजर रहा है। 150 से ज्यादा नए एयरपोर्ट और हजारों किलोमीटर लंबी सड़कों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या और कनेक्टिविटी के बीच एक बड़ा फासला साफ दिख रहा है। साल 2024 में डोमेस्टिक टूरिज्म ने 3 अरब विजिट्स का आंकड़ा पार कर लिया है, लेकिन विदेशी टूरिस्टों के मामले में हम छोटे देशों से भी पिछड़ रहे हैं।

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए चुनौती

होटल चेन्स और टूरिज्म कंपनियों को डोमेस्टिक डिमांड से मजबूती तो मिली है, लेकिन विदेशी टूरिस्टों की कमी से 'रेवेन्यू पर अवेलेबल रूम' (RevPAR) में वैसी बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है जैसी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों से होती है। विदेशी मेहमान आमतौर पर ज्यादा समय रुकते हैं और प्रीमियम सेवाओं पर अधिक खर्च करते हैं, जो किसी भी होटल के मार्जिन को बढ़ाने के लिए जरूरी है।

मार्केटिंग में कमी बनी बाधा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बुनियादी ढांचे के बाद अब 'ब्रांडिंग' पर फोकस करने की जरूरत है। फिलहाल, भारत की टूरिज्म ब्रांडिंग राज्यों के स्तर पर बंटी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच एक स्पष्ट संदेश नहीं जा पा रहा है।

आउटबाउंड टूरिज्म का खतरा

एक और बड़ा ट्रेंड यह है कि भारतीय अब विदेश यात्राएं ज्यादा कर रहे हैं। आउटबाउंड टूरिज्म, इनबाउंड टूरिज्म की तुलना में काफी तेजी से बढ़ रहा है। इससे भारत के फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) बैलेंस पर दबाव बढ़ रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या सरकार और कंपनियां 'इनबाउंड डिमांड' को बढ़ाने के लिए कोई नई स्ट्रैटेजी अपनाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.