भारतीय टूरिज्म सेक्टर का GDP में योगदान बढ़कर **5.22%** पर पहुंच गया है, जिसमें **428.55 करोड़** घरेलू यात्राएं दर्ज की गई हैं। सरकार अब कनेक्टिविटी सुधारने के लिए UDAN स्कीम के तहत **₹28,840 करोड़** का बड़ा निवेश करने जा रही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में टूरिज्म सेक्टर एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, इस सेक्टर ने देश की कुल GDP में 5.22% का योगदान दिया है। वर्ष 2025 में 428.55 करोड़ घरेलू पर्यटकों ने देश की अलग-अलग जगहों की यात्रा की, जिससे यह सेक्टर लगभग 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
UDAN स्कीम का नया दौर
सरकार टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए तैयार है। UDAN स्कीम के 2026-2036 फेज के लिए ₹28,840 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। इस प्लान के तहत 100 नए एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे। इसका मुख्य लक्ष्य छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) तक हवाई कनेक्टिविटी को पहुंचाना है, ताकि भीड़ का दबाव प्रमुख टूरिस्ट हब से कम हो सके।
डिजिटल पुश और चुनौतियां
सरकार 'नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक' और ई-वीजा सुविधा को 172 देशों तक बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी रास्ता आसान बना रही है। हॉस्पिटैलिटी और एविएशन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है, क्योंकि बेहतर कनेक्टिविटी से होटल ऑक्यूपेंसी और एयर ट्रैफिक बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, निवेशकों को संभलकर रहना चाहिए। होटल, एयरलाइंस और ट्रैवल कंपनियों का मुनाफा काफी हद तक कंज्यूमर खर्च (Discretionary Spending) पर निर्भर करता है। महंगाई बढ़ने या इकोनॉमी में सुस्ती आने पर लोग सबसे पहले अपनी यात्रा का बजट कम करते हैं। इसके अलावा, सरकारी और प्राइवेट स्तर पर हो रहे आक्रामक विस्तार में लागत बढ़ने (Cost Overruns) का रिस्क भी बना रहता है, जो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
