भारत ने **2047** तक टूरिज्म सेक्टर को **$3 ट्रिलियन** की इकोनॉमी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। अब फोकस सिर्फ भीड़ जुटाने पर नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू टूरिज्म पर है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश के बड़े मौके खुल रहे हैं, लेकिन **2035** तक **1.1 करोड़** स्किल्ड वर्कर्स की कमी इस ग्रोथ के लिए सबसे बड़ा रिस्क है।
भारत अब टूरिज्म के पारंपरिक मॉडल को बदलकर एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। 'विकसित भारत 2047' के तहत सरकार का लक्ष्य टूरिज्म को $3 ट्रिलियन का इकोनॉमिक इंजन बनाना है। फाइनेंशियल ईयर 2024 में डोमेस्टिक टूरिस्ट्स ने $162.9 बिलियन खर्च किए, जिससे साफ है कि अभी हम घरेलू डिमांड पर ही टिके हैं। अब सरकार रूरल, एडवेंचर और क्रूज टूरिज्म जैसे специализирован सर्किट्स पर जोर दे रही है ताकि बड़े शहरों के अलावा अन्य जगहों का भी विकास हो सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर और टियर-2 शहरों में मौके
कनेक्टिविटी की समस्या को दूर करने के लिए देश में 2026 तक 166 एयरपोर्ट्स ऑपरेशनल हो चुके हैं और वंदे भारत ट्रेन नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। इन्वेस्टर्स के लिए अब असली मौका टियर-2 और टियर-3 शहरों में है। ब्रांडेड होटल चेन और होमस्टे नेटवर्क इन उभरते बाजारों में बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं। रणनीति यह है कि अलग-अलग पर्यटन स्थलों को जोड़कर 'मल्टी-डेस्टिनेशन कॉरिडोर' तैयार किए जाएं, जिससे पर्यटकों का स्टे और खर्च दोनों बढ़ सकें।
मानव संसाधन (Human Capital) का संकट
भले ही इंफ्रास्ट्रक्चर का ढांचा मजबूत हो रहा हो, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती टैलेंट की कमी है। फाइनेंशियल ईयर 2024 में इस सेक्टर ने 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार दिया था, लेकिन 2035 तक 1.1 करोड़ स्किल्ड वर्कर्स की भारी कमी होने की आशंका है। अगर समय रहते एमआईसीई (MICE), वेलनेस और हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी में टैलेंट पाइपलाइन तैयार नहीं की गई, तो होटल और टूरिज्म कंपनियों के लिए सर्विस क्वालिटी बनाए रखना मुश्किल होगा। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि केवल फिजिकल एक्सपेंशन काफी नहीं है, बल्कि कंपनियों की टैलेंट रिटेंशन क्षमता भी उनके मुनाफे को प्रभावित करेगी।
नीतिगत और मार्केट मॉनिटरवेबल्स
सरकार अब टूरिज्म में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन और सस्टेनेबिलिटी को अनिवार्य कर रही है। हाल ही में विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा 91.5 लाख पहुंच गया है और उनका औसत स्टे 18.1 दिन रहा है। भविष्य में वीजा नियमों में सरलीकरण और ब्रांडिंग पर सरकार का फोकस रहेगा। निवेशकों को देखना होगा कि अलग-अलग राज्य अपनी टूरिज्म पॉलिसी कैसे लागू करते हैं और क्या पूरे देश में टूरिज्म सेक्टर को 'इंडस्ट्री स्टेटस' का दर्जा मिलता है या नहीं।
