भारत में इस फेस्टिव सीजन ट्रैवलिंग का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। लंबी छुट्टियों की जगह अब लोग छोटे और बार-बार होने वाले 'माइक्रो-ट्रिप्स' (micro-trips) को तरजीह दे रहे हैं, जिससे बुकिंग्स में पिछले साल के मुकाबले **50%** की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
भारत के ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कंज्यूमर बिहेवियर में बड़ा बदलाव आया है। 'Zostel Festive Travel Pulse 2026' की रिपोर्ट के अनुसार, लोग अब साल में एक लंबी छुट्टी के बजाय छोटे-छोटे ट्रिप्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।\n\n### हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर असर\n\nट्रेंड के बदलने से प्लानिंग का तरीका भी बदल गया है। अब लोग आखिरी समय में बुकिंग (last-minute booking) कर रहे हैं, जिससे होटल ऑपरेटर्स के लिए ऑक्यूपेंसी (occupancy) और इन्वेंट्री को मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, औसतन 2 रातों वाली इन ट्रिप्स की वजह से होटलों में चहल-पहल बनी हुई है।\n\n### हिमालयी इलाकों में सबसे ज्यादा डिमांड\n\nहिमालय की वादियों, खासकर सांगला (Sangla), कल्पा (Kalpa) और छितकुल (Chitkul) जैसे क्षेत्रों में बुकिंग्स पिछले साल के मुकाबले 2 गुना से ज्यादा बढ़ गई हैं। सोलो ट्रैवलर्स इस ट्रेंड में सबसे आगे हैं और मार्केट में उनकी हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों से सबसे ज्यादा ट्रैवल डिमांड निकलकर आ रही है।\n\n### निवेशकों के लिए संकेत\n\nइस ट्रेंड का असर Indian Hotels, EIH (Oberoi), Lemon Tree Hotels और Easy Trip Planners जैसी लिस्टेड कंपनियों के मुनाफे और रेवेन्यू पर दिख सकता है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे इन कंपनियों के ऑक्यूपेंसी रेट और ARR (Average Daily Rate) पर नजर रखें। जिन कंपनियों की पहुंच ऑफ-बीट डेस्टिनेशन्स तक है, उन्हें इस 'माइक्रो-ट्रिप' बूम का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।
