बजट का सीधा असर: न्यूक्लियर पावर सेक्टर को मिली बड़ी संजीवनी
हालिया Union Budget 2026-27 में भारत के न्यूक्लियर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खास ज़ोर दिया गया है। सरकार ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए ज़रूरी इंपोर्ट किए जाने वाले सामानों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट को 2035 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला इस सेक्टर में निवेश को आकर्षित करने और ज़रूरी टेक्नोलॉजी के इंपोर्ट को आसान बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कदम न्यूक्लियर पावर जनरेशन को बढ़ाने में सीधा मददगार साबित होगा, खासकर जब इस सेक्टर को अब प्राइवेट कंपनियों के लिए भी खोल दिया गया है।
प्राइवेट सेक्टर की राह हुई आसान: SHANTI Act और निवेश का गणित
हालिया कानूनी और फिस्कल पॉलिसी के तहत भारत के न्यूक्लियर सेक्टर का परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है। 2025 में लागू हुए Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act ने पुराने सरकारी एकाधिकार को खत्म कर दिया है। अब प्राइवेट कंपनियाँ न्यूक्लियर प्लांट ऑपरेशन और पावर जनरेशन में हिस्सा ले सकती हैं। यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी न्यूक्लियर क्षमता को 8.8 GW से बढ़ाकर 100 GW करने का है। इस बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए करीब $211 बिलियन USD के निवेश की ज़रूरत होगी। बजट में कस्टम ड्यूटी माफी से विशेष उपकरणों के इंपोर्ट की लागत कम होगी, जिससे ग्लोबल मार्केट में हावी Light Water Reactor (LWR) टेक्नोलॉजी को अपनाने में मदद मिल सकती है, हालांकि भारत ने ऐतिहासिक रूप से Pressurised Heavy Water Reactors (PHWRs) पर ध्यान केंद्रित किया है।
सेक्टर के मुख्य खिलाड़ी: NTPC और BHEL
इस सेक्टर के विस्तार में Public Sector Undertaking (PSU) NTPC, जो भारत का सबसे बड़ा पावर जनरेटर है, एक अहम भूमिका निभाएगा। जनवरी 2026 तक, NTPC का Price-to-Earnings (P/E) ratio लगभग 14.14 है और इसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹3,45,007 Cr है। वहीं, पावर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में अहम खिलाड़ी Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) की वित्तीय तस्वीर थोड़ी अलग है। BHEL का P/E ratio 112.33 है, जो कुछ स्रोतों के अनुसार नेगेटिव P/E ratio भी बताता है, जिसका मतलब है कि स्टॉक प्राइस की तुलना में वर्तमान प्रॉफिटेबिलिटी में चुनौतियाँ हैं। इसकी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹91,526 Cr है। स्टॉक का ₹176 से ₹305.90 का 52-सप्ताह का ट्रेडिंग रेंज इसकी अस्थिरता को दर्शाता है।
बाज़ार का रिएक्शन और भविष्य की राह
हालांकि, बजट वाले दिन डेरिवेटिव्स पर बढ़े हुए Securities Transaction Tax (STT) के कारण व्यापक शेयर बाज़ार में गिरावट देखी गई, लेकिन न्यूक्लियर सेक्टर के लिए खास प्रावधानों का मक़सद तत्काल बाज़ार की अटकलों के बजाय दीर्घकालिक औद्योगिक विकास है। वैश्विक न्यूक्लियर इंडस्ट्री डीकार्बोनाइजेशन के प्रयासों से पुनर्जीवित हो रही है, और भारत की पॉलिसी में बदलाव इसी व्यापक अंतर्राष्ट्रीय रुझान के अनुरूप हैं।
नियामकीय ढांचे में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा मिलने और फिस्कल इंसेंटिव्स से इंपोर्ट लागत कम होने के साथ, भारत की न्यूक्लियर पावर क्षमता में तेज़ी से विकास के लिए मंच तैयार है। सरकार का 2047 तक 100 GW हासिल करने का स्पष्ट महत्वाकांक्ष, टेक्नोलॉजी इंपोर्ट और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने वाली नीतियों के साथ, इस सेक्टर को महत्वपूर्ण विकास के लिए तैयार करता है। NTPC और BHEL जैसी कंपनियाँ इस विस्तार में मुख्य खिलाड़ी होंगी, हालाँकि उनकी व्यक्तिगत वित्तीय सेहत और रणनीतिक स्थिति यह तय करेगी कि वे इन अवसरों का कितना लाभ उठा पाती हैं।