Budget 2026: भारत का टूरिज्म सेक्टर बूम पर! इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव, सफर होगा सस्ता

TOURISM
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Budget 2026: भारत का टूरिज्म सेक्टर बूम पर! इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव, सफर होगा सस्ता
Overview

Union Budget 2026 ने भारत के ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर को नई मजबूती दी है। इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) पर बड़ा जोर दिया गया है और सफर को पहले से कहीं ज्यादा किफायती बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं।

साल 2026 के यूनियन बजट में भारत के ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर को आर्थिक विकास का एक अहम स्तंभ माना गया है। सरकार ने इस सेक्टर को केवल एक 'वैकल्पिक खर्च' (Discretionary Spending) से आगे बढ़कर एक मजबूत आधार देने का फैसला किया है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने, कनेक्टिविटी बढ़ाने और यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुलभ बनाने पर खास जोर दिया गया है, जिसका मकसद पूरे देश में विकास को गति देना है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश

सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) 2026-27 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में भारी बढ़ोतरी करते हुए ₹12.2 लाख करोड़ का आवंटन किया है, जो पिछले साल से लगभग 9% ज्यादा है। इस फंड का बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, खासकर हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर और नई रेलवे लाइनों के विकास पर खर्च किया जाएगा। बजट में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (High-Speed Rail Corridors) बनाने की भी योजना है, जिन्हें 'ग्रोथ कनेक्टर्स' नाम दिया गया है। इनसे शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और नए आर्थिक केंद्रों व टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंच आसान बनेगी। इसके अलावा, छोटे और मझोले शहरों (Tier-II, Tier-III Cities) और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए अगले पांच सालों में हर सिटी इकोनॉमिक रीजन (CER) को ₹5,000 करोड़ दिए जाएंगे। इससे इन इलाकों की छुपी हुई टूरिज्म क्षमता को भी बाहर लाने में मदद मिलेगी। पानी के जहाजों (Seaplanes) जैसे नए ट्रांसपोर्ट मोड को बढ़ावा देना भी रीजनल एक्सेसिबिलिटी बढ़ाएगा।

यात्रा को बनाया जा रहा है सस्ता

विदेश यात्रा अब और भी आसान होने वाली है। बजट में फॉरेन टूर पैकेजों पर लगने वाले टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दर को तर्कसंगत बनाया गया है। अब सभी पर केवल 2% TCS लगेगा, जो पहले 5% और 20% की स्लैब में था। इससे विदेश जाने वाले भारतीय यात्रियों पर शुरुआती बोझ काफी कम हो जाएगा। यह कदम ग्राहकों और टूर ऑपरेटर्स दोनों के लिए नकदी (Liquidity) की समस्या को दूर करेगा। एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के सामान की क्लीयरेंस (Baggage Clearance) को भी आसान बनाया जाएगा, जिससे यात्रियों को इंतजार कम करना पड़ेगा और उनका अनुभव बेहतर होगा।

अनुभव और स्किल्स पर भी फोकस

सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि टूरिज्म के अनुभव की क्वालिटी को भी सुधारा जाएगा। नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे सेक्टर में प्रोफेशनलिज्म बढ़ेगा। 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को ट्रेनिंग देने का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिससे सर्विस स्टैंडर्ड्स और लोकल एंगेजमेंट में सुधार होगा। 15 ऐतिहासिक पुरातत्व स्थलों (Archaeological Sites) को एक्सपीरियंस-सेंट्रिक कल्चरल हब (Experiential Cultural Hubs) के तौर पर विकसित करने और टिकाऊ, अनुभव-आधारित टूरिज्म (Sustainable, Experience-led Tourism) को बढ़ावा देने के प्रस्ताव भी हैं। इसमें इको-फ्रेंडली ट्रेकिंग ट्रेल्स और नेचर-बेस्ड एक्टिविटीज शामिल हैं। यह सब Millennials और Gen Z जैसे युवा वर्ग की पसंद के अनुरूप है, जो अब सिर्फ घूमने की बजाय अनोखे अनुभव तलाश रहे हैं। नॉर्थ-ईस्ट में बुद्धिस्ट सर्किट जैसे स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट को भी बेहतर कनेक्टिविटी और खास निवेश का फायदा मिलेगा।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.