शानदार स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस, पर ऑडिटर की चिंताओं ने बढ़ाई धड़कन
India Tourism Development Corporation Ltd. (ITDC) ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3) और नौ महीनों के अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश किए हैं। इन नतीजों में कंपनी की अकेले दम पर (standalone) ऑपरेशनल परफॉर्मेंस तो शानदार रही, लेकिन ऑडिटर की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दे चिंताजनक हैं।
Q3 FY2025 के नंबर्स:
- कंपनी के स्टैंडअलोन रेवेन्यू में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 28.69% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹1,833.20 करोड़ पर पहुंच गया।
- वहीं, नेट प्रॉफिट में तो और भी बड़ा उछाल देखने को मिला, जो 68.73% बढ़कर ₹282.86 करोड़ हो गया। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) बेसिस पर भी रेवेन्यू और प्रॉफिट में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई है।
नौ महीनों (Nine Months) का हाल:
- 31 दिसंबर, 2025 तक के नौ महीनों में, ITDC का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 4.91% बढ़कर ₹3,868.84 करोड़ रहा।
- स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 21.61% बढ़कर ₹5,566.49 करोड़ तक पहुंच गया।
कंसॉलिडेटेड तस्वीर:
- हालांकि, कंसॉलिडेटेड (consolidated) नतीजों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है। इस अवधि में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में मामूली 0.78% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹3,910.14 करोड़ रहा।
- कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 3.27% की गिरावट आई और यह ₹5,452.12 करोड़ दर्ज किया गया। यह ITDC की सब्सिडियरीज (subsidiaries) के सामने आ रही मुश्किलों की ओर इशारा करता है।
ऑडिटर की 'क्वालिफाइड' रिपोर्ट का मतलब:
ITDC के इन नतीजों की चमक ऑडिटर HDSG & Associates की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट से थोड़ी फीकी पड़ गई है। ऑडिटर ने 'क्वालिफाइड कंक्लूजन' दिया है, जिसका मतलब है कि कुछ गड़बड़ियां हैं। रिपोर्ट में कई अहम मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं:
- बकाया (Receivables) की रिकवरी: सबसे बड़ी चिंता ₹187.13 करोड़ के ऐसे बकाये को लेकर है, जो जनरल सेल्स एजेंट (GSA) एग्रीमेंट से जुड़े हैं। इन पर नियमों का पालन न होने के कारण इनकी रिकवरी पर शक है।
- कम्पलायंस (Compliance) की कमी: टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जैसे मामलों में नियमों का पालन ठीक से नहीं हुआ है। साथ ही, TDS रिसीवेबल्स और अन-लिंक्ड रिसीट्स को रिकंसाइल करने में भी दिक्कतें आईं, जिसका असर रिसीवेबल्स और लायबिलिटीज दोनों पर पड़ा।
- प्रॉपर्टी, प्लांट और इक्विपमेंट (PPE) रिकॉर्ड: PPE के रिकॉर्ड्स को ठीक से मेंटेन नहीं किया गया है, जिससे संभावित नुकसान या कमी का असर पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
- रेवेन्यू रिकग्निशन: विवादित लाइसेंस फीस से होने वाले रेवेन्यू को पहचानने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं।
- सब्सिडियरी के नतीजे: सबसे अहम बात यह है कि कुछ सब्सिडियरीज के फाइनेंशियल रिजल्ट्स को सिर्फ मैनेजमेंट के सर्टिफिकेशन के आधार पर शामिल किया गया है, जिसका मतलब है कि उन पर पूरी तरह से ऑडिटर की जांच नहीं हुई। इससे कंसॉलिडेटेड नतीजों की विश्वसनीयता कम हो जाती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
ITDC के नतीजे निवेशकों के लिए एक बड़ी पहेली की तरह हैं। एक तरफ, Q3 में कंपनी का अकेले दम पर प्रदर्शन बताता है कि कोर बिजनेस पटरी पर लौट रहा है। लेकिन, ऑडिटर की इस 'क्वालिफाइड' रिपोर्ट से नतीजों की असलियत और अंदरूनी कंट्रोल पर बड़ा शक पैदा होता है, खासकर कंसॉलिडेटेड फिगर को लेकर। इसके अलावा, कंपनी में गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे, जैसे कि सिर्फ एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर का होना और ऑडिट कमेटी के कोरम (quorum) की समस्या, जोखिम को और बढ़ाते हैं। साथ ही, कंपनी में चल रही डिसइन्वेस्टमेंट और मर्जर की योजनाएं भविष्य को लेकर और अनिश्चितता पैदा कर रही हैं। ऐसे में, निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले ऑपरेशनल सुधारों और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग व गवर्नेंस से जुड़े गंभीर जोखिमों का ध्यान रखना होगा।