IHCL के MD और CEO पुनीत छतवाल ने भारत के टूरिज्म सेक्टर को लेकर बड़ा विजन रखा है। उनका मानना है कि 2047 तक इस सेक्टर के $3 ट्रिलियन तक पहुंचने के लिए 20 लाख नए होटल रूम्स की जरूरत होगी, जो निवेशकों के लिए अवसर और चुनौती दोनों हैं।
टूरिज्म सेक्टर का नया रोडमैप
IHCL के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO पुनीत छतवाल ने देश के टूरिज्म सेक्टर को लेकर भविष्य की तस्वीर साफ की है। फिलहाल यह सेक्टर $250 बिलियन का है, जिसे 2047 तक $3 ट्रिलियन के स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देशभर में 20 लाख नए ब्रांडेड होटल रूम्स जोड़ने की जरूरत है।
निवेशकों के लिए चुनौती और अवसर
इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक दोधारी तलवार है। जहां डिमांड बढ़ रही है, वहीं सेक्टर का कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) होना एक चुनौती है। भारत में हाई बोरिंग कॉस्ट (Borrowing costs) की वजह से कंपनियों के बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ सकता है।
एसेट-लाइट मॉडल की ओर झुकाव
इस दबाव से बचने के लिए IHCL, Lemon Tree Hotels और Chalet Hotels जैसी दिग्गज कंपनियां अब 'एसेट-लाइट' (Asset-light) मॉडल अपना रही हैं। इसमें कंपनियां खुद प्रॉपर्टी खरीदने के बजाय दूसरों की प्रॉपर्टीज को मैनेज करती हैं। इससे कंपनी का कर्ज कम रहता है और ब्रांड की पहुंच भी तेजी से बढ़ती है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कम कर्ज वाली कंपनियां हाई इंटरेस्ट रेट वाले दौर में ज्यादा लचीलापन दिखाती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी की कमी
पुनीत छतवाल ने एक बड़ी चिंता जाहिर की कि 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' और बिखरी हुई पॉलिसीज ग्रोथ को धीमा कर सकती हैं। उनका मानना है कि अगर एक यूनिफाइड पॉलिसी फ्रेमवर्क मिले, तो प्रोजेक्ट अप्रूवल्स तेजी से होंगे और इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा।
रोजगार का जरिया
टूरिज्म सेक्टर वर्तमान में 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है। छतवाल के मुताबिक, इस सेक्टर में हर ₹1 करोड़ के निवेश से लगभग 80 नौकरियां पैदा होती हैं। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ, तो 2047 तक यह आंकड़ा 10 करोड़ नौकरियों तक पहुंच सकता है। निवेशकों को अब भविष्य में कंपनियों के होटल रूम जोड़ने की रफ्तार और उनके डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-equity ratio) पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
