आज़ादी के जश्न वाले लंबे वीकेंड के लिए देश भर के होटलों ने अपने किराए में **10%** से **20%** तक की बढ़ोतरी कर दी है। कॉर्पोरेट ट्रैवलर्स और वीकेंड टूरिस्ट्स की ज़बरदस्त डिमांड के चलते गोवा और उदयपुर जैसे पॉपुलर डेस्टिनेशन पर दाम आसमान छू रहे हैं। यह उछाल तब देखने को मिल रहा है, जब छुट्टी शनिवार को पड़ रही है।
कहां और क्यों बढ़े दाम?
आज़ादी के इस लंबे वीकेंड पर भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में ज़बरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। देश के मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर होटलों ने पिछले साल के मुकाबले किराए में 10% से 20% तक का इज़ाफा किया है। गौर करने वाली बात यह है कि 15 अगस्त शनिवार को पड़ने के बावजूद किराए में यह तेजी देखी जा रही है।
डिमांड के पीछे की वजह?
इस ज़बरदस्त डिमांड के पीछे कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और रीजनल ट्रैवलर्स का बड़ा हाथ है। उदयपुर, गोवा, मसूरी और जिम कॉर्बेट जैसे डेस्टिनेशंस पर बुकिंग्स ज़ोरों पर हैं। कई लग्जरी प्रॉपर्टीज़ में तो 60% तक कमरे पहले से ही बुक हो चुके हैं। इससे साफ है कि लोग ज़्यादा किराए के बावजूद छोटी-छोटी छुट्टियों के लिए इन जगहों को तरजीह दे रहे हैं।
हॉस्पिटैलिटी कंपनियों पर असर?
पब्लिकली लिस्टेड होटल कंपनियों और बड़े ऑपरेटर्स के लिए यह पोस्ट-पैंडेमिक रिकवरी फेज का ही एक हिस्सा है। जब रूम रेंट बढ़ते हैं, तो 'राजस्व प्रति उपलब्ध कमरा' (RevPAR) यानी Revenue Per Available Room बढ़ता है, जो होटल इंडस्ट्री का एक अहम पैरामीटर है। अगर ऑक्यूपेंसी (Occupancy) भी हाई रहती है, तो कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) में सुधार आता है।
हालांकि, निवेशकों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस ऑपरेशनल कॉस्ट्स (Operational Costs) के प्रति संवेदनशील होता है। भले ही किराए बढ़ें, लेकिन स्टाफ, खाने-पीने और एनर्जी के बढ़ते खर्चे भी प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल सकते हैं, खासकर पीक सीजन में। साथ ही, यह फायदा शायद सभी होटलों को एक बराबर न मिले, क्योंकि डिमांड अक्सर कुछ खास हाई-एंड लोकेशंस पर ही सिमट जाती है।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या यह तेजी फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही के बाकी बचे दिनों में भी जारी रहती है। लंबे वीकेंड से भले ही कुछ समय के लिए रेवेन्यू (Revenue) में उछाल आ जाए, लेकिन सेक्टर की असली सेहत कॉर्पोरेट ट्रैवल और मैक्रोइकोनॉमिक प्रेशर (Macroeconomic Pressure) के बीच प्राइजिंग पावर (Pricing Power) बनाए रखने पर निर्भर करेगी। निवेशक होटल कंपनियों के अगले क्वार्टरली रिजल्ट्स में एवरेज रूम रेट (Average Room Rate) और ऑक्यूपेंसी टारगेट्स (Occupancy Targets) पर नज़र रख सकते हैं।
