Waterways Leisure Tourism, जो Cordelia Cruises का संचालन करती है, ने 2032 तक भारत को दुनिया के शीर्ष पांच क्रूज बाजारों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि कंपनी अपने फ्लीट का विस्तार कर रही है, लेकिन हालिया मुनाफे में वन-टाइम गेन का बड़ा हाथ है, और निवेशकों को कंपनी के कर्ज और बढ़ते ईंधन खर्च पर नजर रखनी होगी।
विस्तार की रणनीति और चुनौतियां
Waterways Leisure Tourism Limited अब भारत के उस 20 करोड़ लोगों के बाजार पर नजरें गड़ाए हुए है, जिनके पास क्रूज टूरिज्म के लिए पर्याप्त डिस्पोजेबल इनकम है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी अपने तीसरे जहाज, Cordelia Sun को तेजी से उतार रही है।
नतीजों का विश्लेषण
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर गौर करें, तो कंपनी की रेवेन्यू ₹132.90 करोड़ रही, जो पिछले साल के मुकाबले 31% ज्यादा है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹58.50 करोड़ रहा, जिसमें ₹49.49 करोड़ का एकमुश्त (one-time) लाभ शामिल है। यह मुनाफा जहाज की जल्द डिलीवरी के कारण हुआ है, यानी कोर ऑपरेशंस से होने वाली कमाई अभी भी दबाव में है।
कर्ज और फ्यूल की मार
मैरीटाइम सेक्टर में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ी चिंता है। कंपनी अपने मार्जिन को बचाने के लिए फ्यूल सरचार्ज और रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसे तरीके अपना रही है। इसके अलावा, कंपनी पर भारी कर्ज का बोझ है, जिसमें अमेरिकी डॉलर में डिनॉमिनेटेड लीज रेंटल शामिल हैं। ऐसे में करेंसी फ्लक्चुएशन और पैसेंजर संख्या में मामूली कमी भी कंपनी की बैलेंस शीट पर भारी पड़ सकती है।
MICE सेक्टर पर दांव
सीजनल पर्यटन पर निर्भरता कम करने के लिए कंपनी अब MICE (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेस और एग्जीबिशन) सेक्टर पर फोकस कर रही है। शादियों और कॉर्पोरेट इवेंट्स के जरिए जहाज की ऑक्यूपेंसी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है ताकि साल भर कमाई सुनिश्चित की जा सके। जून 2026 में पब्लिक डेब्यू के बाद से ही शेयर में काफी उतार-चढ़ाव दिखा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या कंपनी अपने कर्ज को मैनेज करते हुए बिना 'वन-टाइम गेन' के भी मुनाफा कमा पाएगी या नहीं।
