जापानी दिग्गज कंपनी Uniqlo अब भारत को सिर्फ अपना बाजार नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन का मुख्य केंद्र बनाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पुष्टि की है कि कंपनी भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ जोड़ने पर काम कर रही है।
भारत से दुनिया तक का सफर
टोक्यो में Uniqlo की लीडरशिप के साथ हुई चर्चाओं के बाद, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बड़ी स्ट्रैटेजिक शिफ्ट की जानकारी दी है। कंपनी अब केवल भारतीय ग्राहकों को सामान बेचने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत को अपने वैश्विक ऑपरेशन्स की रीढ़ बनाएगी। Uniqlo का इरादा भारत में बने उत्पादों को अपने 3,500 से 4,000 स्टोरों तक पहुँचाने का है।
क्यों है यह फैसला अहम?
Fast Retailing के फाइनेंशियल नतीजों पर नजर डालें तो कंपनी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ¥3.0651 ट्रिलियन रहा है, जिसमें 17.1% की बढ़त दर्ज की गई है। यह शानदार फाइनेंशियल स्थिति कंपनी को भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को तेजी से बढ़ाने की फ्लेक्सिबिलिटी दे रही है।
सामने चुनौतियां क्या हैं?
इतना बड़ा बदलाव आसान नहीं होगा। जापानी येन में उतार-चढ़ाव (Currency Volatility) का असर मार्जिन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, भारत के रिटेल मार्केट में H&M, Zara, Reliance और Tata जैसे दिग्गजों से कड़ी टक्कर मिलना तय है। कंपनी का लक्ष्य 30% लोकल सोर्सिंग हासिल करना है, लेकिन ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को भारत में पूरी तरह लागू करना एक बड़ा लॉजिस्टिकल टास्क साबित हो सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि Uniqlo कितनी तेजी से भारतीय सप्लायर्स को अपने नेटवर्क में शामिल करती है।
