US Tariff Policy: भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स पर मंडराया खतरा, चीन-वियतनाम से पिछड़ने का डर

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AuthorAditya Rao|Published at:
US Tariff Policy: भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स पर मंडराया खतरा, चीन-वियतनाम से पिछड़ने का डर

भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिकी बाज़ार में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। भले ही भारत पर **10%** टैरिफ लगा है, जो चीन और वियतनाम से कम है, लेकिन कोटा छूट न मिलने से भारत का मुकाबला मुश्किल हो सकता है।

Detailed Coverage

टैरिफ की मार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा

अमेरिकी सरकार की नई सेक्शन 301 नीति के चलते भारतीय टेक्सटाइल और एपैरल एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाज़ार में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि भारत पर 10% टैरिफ लगाया गया है, जो चीन (12.5%) और वियतनाम (12.5%) की तुलना में कम है, लेकिन कुछ देशों को मिली कोटा छूट (TRQ exemptions) ने मुकाबले को और कड़ा कर दिया है।

बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों को अमेरिका-उत्पन्न कपास और फाइबर का उपयोग करके खास मात्रा में इम्पोर्ट पर विशेष रियायतें मिल रही हैं। इसके विपरीत, भारतीय निर्माताओं को ऐसी किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे वे पिछड़ सकते हैं।

टैरिफ में अंतर और बाज़ार में स्थिति

Emkay Research के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका में भारत की प्रभावी टैरिफ दर लगभग 12% है, जबकि बांग्लादेश की 25% और चीन की 22% है। लेकिन, कोटा छूट का अभाव एक महत्वपूर्ण कारक साबित हो रहा है। भारत के कुल एक्सपोर्ट का लगभग 55% हिस्सा नए 10% टैरिफ के दायरे में आता है। बाकी 45% सामान, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं, या तो इस टैरिफ से मुक्त हैं या फिर स्टील और एल्युमीनियम से संबंधित अलग नीतियों के तहत आते हैं।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में भारतीय एक्सपोर्ट्स ने अमेरिका को औसतन $8.4 बिलियन प्रति माह के हिसाब से बेचा है, जो पिछले छह महीनों के $6.5 बिलियन के औसत से काफी ज़्यादा है।

जोखिम और आगे की राह

निर्यात में स्थिरता के बावजूद, उद्योग अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम अतिरिक्त टैरिफ का लगना है, खासकर तब जब अमेरिका यह निष्कर्ष निकालता है कि भारतीय एक्सपोर्ट्स को अनुचित लाभ मिल रहा है। इसके अलावा, टेक्सटाइल सेक्टर को अमेरिकी बाज़ार में मांग में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी निपटना होगा, जो भारतीय एपैरल के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है।

भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए दीर्घकालिक नज़रिया भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की प्रगति पर निर्भर करेगा। दक्षिण एशियाई और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए तरजीही पहुंच (preferential access) और औपचारिक कोटा व्यवस्था हासिल करना महत्वपूर्ण होगा। निवेशकों को ऑर्डर बुक, निर्यात गंतव्यों में बदलाव और व्यापार वार्ताओं से जुड़े अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये कारक आने वाली तिमाहियों में सेक्टर के मार्जिन और वॉल्यूम ग्रोथ को निर्धारित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.