अमेरिका के प्रस्तावित 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' ने भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस कानून के तहत नए टैरिफ लगने का खतरा है, जिससे एक्सपोर्ट मार्केट में भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
अमेरिका में प्रस्तावित नए कानून से भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर में हलचल है। भारतीय एक्सपोर्टर्स को डर है कि अगर यह बिल लागू हुआ, तो अमेरिका में उनके प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय माल की वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षमता कम हो सकती है। चूंकि अमेरिका भारत के लिए कपड़ों का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, इसलिए यहां कोई भी नीतिगत बदलाव सीधे मुनाफे पर चोट करेगा।
छोटे उद्योगों पर सबसे ज्यादा मार
Confederation of Indian Textile Industry (CITI) के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने चेतावनी दी है कि सेक्टर के कई MSMEs के पास इतना वित्तीय दम नहीं है कि वे टैरिफ का बोझ झेल सकें। टेक्सटाइल बिजनेस में मार्जिन पहले ही बहुत पतले होते हैं। अगर सरकार ने नए लेवीज लगाए, तो भारतीय कंपनियां वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ सकती हैं, जिन्हें इस तरह के रेगुलेटरी दबाव का सामना नहीं करना पड़ता।
एक्सपोर्ट के आंकड़े क्या कहते हैं?
सेक्टर पहले ही कमजोरी के दौर से गुजर रहा है। हालांकि अगस्त 2026 में कुल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 13.03% की बढ़त दिखी, लेकिन कपड़े (Apparel) का एक्सपोर्ट 2.74% गिर गया। अप्रैल से अगस्त 2026 की अवधि में इसमें 9.10% की गिरावट दर्ज की गई है।
निवेशकों को अब कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी होगी, ताकि यह समझा जा सके कि किन कंपनियों का अमेरिका पर ज्यादा निर्भरता है और वे इस रिस्क को कैसे मैनेज कर रही हैं।
