Tiruppur Exporters Association: बिचौलियों की छुट्टी! निर्यातकों के लिए नई डिजिटल लॉन्च

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tiruppur Exporters Association: बिचौलियों की छुट्टी! निर्यातकों के लिए नई डिजिटल लॉन्च

तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) ने निर्यातकों के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसका मकसद गारमेंट निर्माताओं को सीधे ग्लोबल खरीदारों से जोड़ना है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके। यह कदम देश के निटवेअर एक्सपोर्ट मार्केट के लिए अहम माना जा रहा है।

बिचौलियों की खत्म होगी भूमिका?

तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) ने निर्यातकों और खरीदारों के बीच की दूरी को कम करने के लिए एक बेहतरीन पहल की है। उन्होंने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो गारमेंट निर्माताओं को सीधे डोमेस्टिक और इंटरनेशनल खरीदारों से मिलाएगा।

अभी तक, इस सेक्टर में कई छोटे और मध्यम दर्जे के निर्माता एक्सपोर्ट ऑर्डर पाने के लिए एजेंट्स या बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं। ये बिचौलिए जहाँ बिजनेस को आसान बनाते हैं, वहीं लागत भी बढ़ाते हैं और निर्माता व खरीदार के बीच एक गैप पैदा करते हैं। इस नए प्लेटफॉर्म का लक्ष्य इस समस्या को दूर करना है। अब खरीदार सीधे वेबसाइट पर लॉग इन करके स्थानीय निर्यातकों से संपर्क कर सकेंगे। इससे सोर्सिंग प्रोसेस में लगने वाली लेयर्स कम होंगी और निर्यातकों को बेहतर मार्जिन मिलने की उम्मीद है। यह तमिलनाडु के इस निटवेअर हब के लिए एक बड़ा कदम है, जो सालाना करीब ₹45,000 करोड़ का एक्सपोर्ट करता है।

कामकाज को बनाएंगे आसान

सिर्फ खरीदारों से जुड़ना ही इस प्लेटफॉर्म का एकमात्र उद्देश्य नहीं है। TEA के सदस्यों के लिए रोजमर्रा के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भी कई टूल्स शामिल किए गए हैं।

  • सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (COO) का डिजिटाइजेशन: एक्सपोर्ट ट्रेड के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन बहुत जरूरी है। पहले इसके लिए काफी मैन्युअल कागजी कार्रवाई करनी पड़ती थी, लेकिन अब इस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इससे सदस्यों के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव काम तेजी से पूरा होगा।
  • स्पेयर कैपेसिटी की लिस्टिंग: डाइंग और प्रिंटिंग हाउस जैसी टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिट्स अपनी खाली पड़ी अतिरिक्त क्षमता को इस प्लेटफॉर्म पर लिस्ट कर सकेंगी। गारमेंट बिजनेस में अक्सर ऐसा होता है कि कोई यूनिट ओवरबुक्ड होती है और दूसरी यूनिट्स के मशीनें खाली पड़ी रहती हैं। इस प्लेटफॉर्म से अतिरिक्त क्षमता का पता चलेगा, जिससे एक्सपोर्टर अपने ऑर्डर को बेहतर ढंग से एलोकेट कर पाएंगे और प्रोडक्शन स्मूथ चलेगा।

इंडस्ट्री में कैसे बनेगीThe Tiruppur Exporters Association (TEA) has launched a new digital platform aimed at linking garment manufacturers directly with domestic and international buyers. This initiative aims to reduce reliance on intermediaries and streamline export documentation processes, boosting operational efficiency for the knitwear hub. The platform will facilitate direct connections, digitize the Certificate of Origin application, and enable textile processing units to list spare capacity. The industry hopes this will enhance competitiveness against global players and increase India's textile export share. competitiveness?

तिरुपुर का टेक्सटाइल इंडस्ट्री बड़ी, सेंट्रलाइज्ड फैक्ट्रियों के बजाय कई छोटी यूनिट्स का क्लस्टर है। यह मॉडल फ्लेक्सिबिलिटी और स्पेशलाइजेशन तो देता है, लेकिन बांग्लादेश या वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए बेहतर कोऑर्डिनेशन की जरूरत होती है। भारत जब नए ट्रेड एग्रीमेंट्स की तरफ बढ़ रहा है और ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है, तो डिजिटल इंटीग्रेशन बहुत जरूरी हो गया है।

इस प्लेटफॉर्म की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एसोसिएशन कितने प्रभावी ढंग से इंटरनेशनल खरीदारों और लोकल वेंडर्स को इससे जोड़ पाता है। यह देखना भी अहम होगा कि यह प्लेटफॉर्म सिर्फ एक इंफॉर्मेशन पोर्टल बनकर रह जाता है या ट्रेड के लिए एक प्राइमरी टूल बनता है। इंडस्ट्री के लिए अगला मॉनिटर करने वाला पॉइंट यह होगा कि इंटरनेशनल बायर्स इस प्लेटफॉर्म को कितना अपनाते हैं और इसका लोकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के ऑर्डर फ्लो पर क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.