कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) अपनी ₹10,683 करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को एक नए विंडो के साथ फिर से खोलने की योजना बना रहा है। इस बार निवेश की सीमा को घटाकर ₹100 करोड़ और ₹150 करोड़ कर दिया गया है, जिससे मैन-मेड फाइबर (MMF) और टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
2021 में शुरू हुई इस PLI स्कीम के तहत अब तक 96 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है, जिन्होंने कुल ₹12,822.67 करोड़ के निवेश का वादा किया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे ₹58,294.18 करोड़ का टर्नओवर जेनरेट होगा। हालांकि, प्रोजेक्ट शुरू होने में देरी हुई है, जिसकी वजह कोरोना महामारी और नए प्रोजेक्ट्स के लिए लगने वाला सामान्य दो साल का समय बताई जा रही है। अभी तक, FY2024-25 के लिए केवल ₹54 करोड़ का ही भुगतान दो कंपनियों को हुआ है।
MMF और टेक्निकल टेक्सटाइल पर खास फोकस
भारत पारंपरिक रूप से कॉटन टेक्सटाइल में मजबूत रहा है। सरकार का यह फैसला, इस PLI स्कीम को MMF और टेक्निकल टेक्सटाइल पर केंद्रित करना, आयात पर निर्भरता कम करने और चीन और वियतनाम जैसे देशों से मुकाबला करने की एक रणनीतिक चाल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉटन गारमेंट्स को इस स्कीम में शामिल करने की योजनाओं को फिलहाल टाल दिया गया है ताकि कैपिटल का फोकस हाई-ग्रोथ वाले सेगमेंट्स पर बना रहे। सरकार का अनुमान है कि ज्यादातर यूनिट्स 2027 तक पूरी क्षमता से काम करने लगेंगी।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों के लिए इस स्कीम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कितनी जल्दी प्रोजेक्ट प्लानिंग से प्रोडक्शन शुरू कर पाती हैं। निवेश की कम की गई सीमाएं छोटे और मध्यम दर्जे के खिलाड़ियों को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर अंतिम असर डिमांड और एक्सपोर्ट मार्केट पर निर्भर करेगा। साथ ही, कंपनियों को अपने बैलेंस शीट पर ज्यादा बोझ डाले बिना कैपिटल खर्च को मैनेज करना होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स नई एप्लीकेशन विंडो की टाइमलाइन पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि यह आने वाले सालों में इंडस्ट्री की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के विस्तार की स्पष्ट तस्वीर देगा।
