तमिलनाडु की स्पिनिंग मिलों के सामने एक नया बिजली संकट खड़ा हो गया है। सरकारी निर्देशों के चलते इन मिलों को पीक ऑवर्स में महंगे डीजल जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़कर **₹30 प्रति यूनिट** तक पहुंचने का डर है।
बढ़ती लागत का दवाब
तमिलनाडु के स्पिनिंग मिल्स सेक्टर के लिए परिचालन लागत (Operational Cost) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। राज्य के पावर ग्रिड मैनेजमेंट के नए निर्देशों के बाद, 'ओपन-एंड स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन' ने सरकार से 24 घंटे निर्बाध ग्रिड पावर देने की मांग की है। फिलहाल, इन मिलों को पीक ऑवर्स के दौरान ग्रिड बिजली के बजाय अपने डीजल जनरेटर का उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है, जिससे पावर की लागत सीधे तौर पर ₹30 प्रति यूनिट तक जा सकती है।
मार्जिन पर सीधी मार
टेक्सटाइल कंपनियों के लिए बिजली सबसे बड़ा खर्चा है। ग्रिड पावर की तुलना में डीजल से बिजली पैदा करना काफी महंगा पड़ता है। कच्चे माल की अस्थिर कीमतों और लॉजिस्टिक्स के खर्चे पहले ही कंपनियों का मुनाफा घटा रहे हैं, ऐसे में बिजली की यह अतिरिक्त लागत मार्जिन पर सीधा प्रहार करेगी।
ऑपरेशन्स पर बड़ा रिस्क
बार-बार पावर सोर्स बदलने से न केवल खर्च बढ़ रहा है, बल्कि संवेदनशील मशीनों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। टेक्सटाइल निर्माण के लिए निरंतर बिजली की सप्लाई जरूरी है। पावर कट या बार-बार बैकअप पर शिफ्ट होने से मशीनें खराब हो सकती हैं और मेंटेनेंस का खर्चा भी बढ़ेगा। इसका सीधा असर एक्सपोर्ट ऑर्डर्स की डिलीवरी पर भी पड़ सकता है, जो समय के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जो निवेशक तमिलनाडु में बड़ी उत्पादन क्षमता वाली टेक्सटाइल कंपनियों पर दांव लगाए बैठे हैं, उन्हें अब इन कंपनियों के तिमाही नतीजों (Quarterly Results) पर कड़ी नजर रखनी होगी। क्या यह बिजली संकट केवल एक अस्थायी बाधा है या यह कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन को लंबे समय के लिए प्रभावित करेगा? मैनेजमेंट कमेंट्री में इस ऊर्जा संकट और उत्पादन में संभावित सुस्ती पर निवेशकों को स्पष्टता की तलाश होगी।
