सूरत का एम्ब्रायडरी सेक्टर एक गंभीर लेबर संकट से गुजर रहा है। कर्मचारी 2025 गुजरात फैक्ट्री कानून के तहत 12-घंटे की शिफ्ट को नकार कर 8-घंटे की शिफ्ट की मांग कर रहे हैं, जिससे टेक्सटाइल हब में कामकाज ठप होने का डर पैदा हो गया है।
सूरत के एम्ब्रायडरी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लेबर विवाद चरम पर है, जिससे उत्पादन रुकने का खतरा बढ़ गया है। 'गांव चलो' अभियान के तहत काम कर रहे प्रवासी मजदूर अब 12-घंटे की शिफ्ट को पूरी तरह से नकार रहे हैं और 8-घंटे के वर्कडे और वीकली ऑफ की मांग पर अड़े हैं। यह टकराव 40,000 से ज्यादा फैक्ट्री मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'टेक्सटाइल एम्ब्रायडरी जॉब वर्क एसोसिएशन ऑफ सूरत' (TEJAS) और हजारों कामगारों के बीच है।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
मामला सीधे तौर पर कमाई और समय का है। मौजूदा 12-घंटे की शिफ्ट में कर्मचारी ₹25,000 से ₹30,000 तक कमा रहे हैं। एसोसिएशन ने 8-घंटे की शिफ्ट के लिए ₹14,300 मासिक वेतन का प्रस्ताव दिया है, जिसे यूनियन ने भारी कटौती मानकर खारिज कर दिया है। हालांकि, जो लोग 12-घंटे की शिफ्ट जारी रखना चाहते हैं, उनके लिए एसोसिएशन ने ₹35,000 का वेतन और बच्चों की शिक्षा जैसी सुविधाएं देने का वादा किया है, लेकिन यूनियन का कहना है कि काम के दौरान सख्त नियमों के कारण वे इन शर्तों से खुश नहीं हैं।
कानून और राजनीति का पेच
यह पूरा विवाद 2025 में पारित 'फैक्ट्री (गुजरात अमेंडमेंट) बिल' से जुड़ा है, जिसने 12-घंटे की शिफ्ट को कानूनी मान्यता दी थी। केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस मुद्दे पर आपसी सुलह की अपील की है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
निवेशकों के लिए रिस्क
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा खतरा प्रोडक्शन टाइमलाइन में अनिश्चितता है। यदि मजदूर शहर छोड़ने की अपनी धमकी पर अमल करते हैं, तो कुशल श्रमिकों की भारी कमी हो सकती है। यूनियन ऑर्गनाइजर अजय दुबे की गिरफ्तारी और छंटनी के आरोपों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। आने वाले हफ्तों में एसोसिएशन और यूनियन के बीच कोई समझौता होता है या नहीं, यह इस टेक्सटाइल हब की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा इंडिकेटर होगा।
