Sri Lakshmi Saraswathi Textiles: घाटे में डूबी कंपनी, ऑडिटर की गंभीर चेतावनी! 'गोइंग कंसर्न' पर सवालिया निशान

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AuthorAditya Rao|Published at:
Sri Lakshmi Saraswathi Textiles: घाटे में डूबी कंपनी, ऑडिटर की गंभीर चेतावनी! 'गोइंग कंसर्न' पर सवालिया निशान
Overview

Sri Lakshmi Saraswathi Textiles (Arni) Limited के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी ने Q3 FY26 में **₹488.47 लाख** का तगड़ा नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले क्वार्टर से **47.9%** ज्यादा है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी के ऑडिटर ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कंपनी का भविष्य अनिश्चित है और 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी एक चालू व्यवसाय के तौर पर इसके संचालन पर सवालिया निशान लगा दिया है।

📉 वित्तीय नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

Sri Lakshmi Saraswathi Textiles (Arni) Limited के Q3 FY26 के नतीजे कंपनी की खराब वित्तीय हालत को दर्शाते हैं। इस तिमाही में कंपनी को ₹488.47 लाख का बड़ा नेट लॉस (Net Loss) हुआ है। यह पिछले क्वार्टर (Q2 FY26) के ₹330.28 लाख के लॉस से 47.9% ज्यादा है। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) के ₹546.97 लाख के लॉस की तुलना में यह 10.7% कम है, लेकिन लगातार बढ़ता घाटा चिंता का विषय है।

कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी लगातार गिर रहा है। Q3 FY26 में नेट सेल्स ₹2113.91 लाख रही, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के ₹2663.89 लाख से 20.7% कम है। पिछले क्वार्टर (Q2 FY26) से तुलना करें तो रेवेन्यू में 9.7% की गिरावट आई है। वहीं, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई नौ महीनों की अवधि में कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹6651.52 लाख रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से 9.3% कम है।

कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) Q3 FY26 में ₹-14.66 रही, और नौ महीनों के लिए यह ₹-35.88 दर्ज की गई है।

🚩 ऑडिटर की गंभीर चेतावनी और कानूनी झटके

नतीजों में सबसे चौंकाने वाली बात ऑडिटर की रिपोर्ट है। उन्होंने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी एक चालू व्यवसाय के तौर पर चलने की क्षमता पर 'मटेरियल अनिश्चितता' (Material Uncertainty) जताई है। इसका मतलब है कि ऑडिटर को शक है कि कंपनी भविष्य में अपना कामकाज जारी रख पाएगी या नहीं। यह चिंता कंपनी के ₹9,195.89 लाख के जमा हुए घाटे (Accumulated Losses) के साथ-साथ लगातार तीन सालों से घाटा और नेगेटिव नेट वर्थ (Negative Net Worth) के कारण पैदा हुई है।

इसके अलावा, कंपनी पर सरकारी बकाये (Statutory Dues) का भुगतान न करने का भी आरोप है। ऑडिटर ने बताया कि कंपनी पर ₹124.23 लाख का कर्मचारी भविष्य निधि (PF) और ₹10.55 लाख का कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) बकाया है, जिसमें ब्याज और पेनल्टी भी शामिल है। साथ ही, ₹12.59 लाख का टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) का भुगतान भी बकाया है। कंपनी ने कुछ आंशिक भुगतान किए हैं, लेकिन ऑडिटर ने चेतावनी दी है कि इससे पेनल्टी और कानूनी पचड़े बढ़ सकते हैं।

🔄 मैनेजमेंट का भरोसा और बैलेंस शीट का जादू

हालांकि, कंपनी का मैनेजमेंट (Management) भविष्य को लेकर उम्मीद जता रहा है। उन्होंने कहा है कि सरकारी पहलों और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के सहारे कंपनी FY 2026-27 में मुनाफे (Profits) और टर्नओवर (Turnover) में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है। मैनेजमेंट ने यह भी भरोसा दिलाया है कि अगले क्वार्टर तक सभी सरकारी बकाया चुका दिए जाएंगे।

एक और बड़ा डेवलपमेंट यह है कि कंपनी ने अपनी जमीन, इमारतों और प्लांट व मशीनरी का रीवैल्यूएशन (Revaluation) कराया है, जिससे ₹28,767.74 लाख का बड़ा रीवैल्यूएशन सरप्लस (Revaluation Surplus) दर्ज हुआ है। इसने कंपनी की 'अदर इक्विटी' (Other Equity) को ₹19,962.02 लाख बढ़ा दिया है। इस रीवैल्यूएशन गेन की वजह से Q3 FY26 के लिए कंपनी का टोटल कॉम्प्रिहेंसिव इनकम (Total Comprehensive Income) ₹19,473.55 लाख रहा, जो ऑपरेशनल नेट लॉस से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है।

मगर, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह रीवैल्यूएशन गेन सिर्फ बैलेंस शीट को बेहतर दिखाता है। कंपनी की असली चुनौती अपने ऑपरेशन से लगातार मुनाफा कमाना और अपने कानूनी बकाये को समय पर चुकाना है। ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' पर चिंता इन ऑपरेशनल दिक्कतों को ही उजागर करती है।

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