Shree Balaji Textiles: IPO में 90% की छलांग के बाद लोअर सर्किट का झटका

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AuthorMehul Desai|Published at:
Shree Balaji Textiles: IPO में 90% की छलांग के बाद लोअर सर्किट का झटका

Shree Balaji (Mala) Textiles के शेयरों ने BSE SME मार्केट में धमाकेदार एंट्री की है। इश्यू प्राइस ₹70 के मुकाबले शेयर ₹133 पर खुले, जो कि **90%** का प्रीमियम था। हालांकि, लिस्टिंग पर हुए इस जोरदार उछाल के बाद, शुरुआती निवेशकों ने मुनाफे की बुकिंग की और शेयर **5%** के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। कंपनी के ₹19 करोड़ के IPO को **200 गुना** से ज्यादा सब्सक्राइब किया गया था।

IPO में 90% की तेज़ शुरुआत

Shree Balaji (Mala) Textiles ने 29 जुलाई 2026 को BSE SME प्लेटफॉर्म पर अपने सफर की शुरुआत की। कंपनी के शेयरों ने इश्यू प्राइस ₹70 के मुकाबले 90% के प्रीमियम पर ₹133 पर ट्रेडिंग शुरू की। यह एक शानदार लिस्टिंग थी, लेकिन कुछ ही देर में शेयर बिकवाली के दबाव में आ गया और 5% गिरकर ₹126.35 पर पहुंच गया, जिसने लोअर सर्किट को हिट कर दिया।

IPO को मिला था ज़बरदस्त सब्सक्रिप्शन

यह IPO, जो 24 जुलाई 2026 को बंद हुआ था, निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। ₹19 करोड़ के इस इश्यू को 200 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला, जो टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर के शेयरों की ज़बरदस्त डिमांड को दर्शाता है। IPO के लिए अलॉटमेंट 27 जुलाई 2026 को फाइनल हुआ था। इस ₹19 करोड़ के फ्रेश इश्यू से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतों और जनरल कॉर्पोरेट पर्पस के लिए करेगी।

कंपनी का बिजनेस और मार्केट पोजीशन

Shree Balaji (Mala) Textiles भारतीय कॉटन साड़ी मार्केट में एक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर और होलसेलर के तौर पर काम करती है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स 'Mala Saree' ब्रांड के तहत बेचती है। एक B2B प्लेयर होने के नाते, कंपनी का प्रदर्शन कॉटन टेक्सटाइल की होलसेल डिमांड से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। निवेशक अक्सर ऐसी छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के वर्किंग कैपिटल साइकिल को ट्रैक करते हैं, क्योंकि ये कंपनियां अपनी प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने के लिए लगातार ऑर्डर फ्लो पर निर्भर करती हैं।

मार्केट की वोलेटिलिटी को समझना

निवेशकों के लिए, SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि शुरुआती उत्साह कम होने के बाद स्टॉक कितना स्टेबल रह पाता है। लोअर सर्किट का यह तेज़ मूव अक्सर उन IPOs में देखा जाता है, जिनमें भारी ओवरसब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग पर तगड़ा प्रीमियम मिलता है। चूंकि यह SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग है, इसलिए मेन बोर्ड की तुलना में लिक्विडिटी कम हो सकती है, जिससे शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में कीमतों में ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भविष्य में, शेयरहोल्डर कंपनी की नई पूंजी का उपयोग करके अपने बिजनेस प्लान को लागू करने की क्षमता और प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल होलसेल सेक्टर में अपनी ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.