S.P. Apparels ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **20.4%** बढ़कर **₹24.87 करोड़** हो गया है, हालांकि रेवेन्यू में मामूली गिरावट दर्ज की गई। बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते कंपनी की मार्जिन में सुधार हुआ है। इसके साथ ही, बोर्ड ने **₹10** के फेस वैल्यू वाले शेयरों को **₹2** में स्प्लिट करने की मंजूरी भी दे दी है।
मुनाफे में कैसे हुई 20.4% की बढ़त?
S.P. Apparels, जो कि एक जानी-मानी भारतीय अपैरल एक्सपोर्टर है, ने 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ₹24.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20.4% ज्यादा है। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में मामूली 0.6% की गिरावट आई है और यह ₹401.08 करोड़ रहा। हालांकि, कंपनी ने बॉटम लाइन में शानदार सुधार दिखाया है।
मार्जिन सुधार और ऑपरेशनल एफिशिएंसी
इस मुनाफे में बढ़त की मुख्य वजह ऑपरेटिंग मार्जिन का 15.3% तक पहुंचना है। कंपनी ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और बेहतर यार्न स्प्रेड पर फोकस किया है।
स्टॉक स्प्लिट और डिविडेंड का ऐलान
फाइनेंशियल नतीजों के साथ ही, कंपनी के बोर्ड ने ₹3 प्रति शेयर का डिविडेंड देने की भी मंजूरी दी है। इसके अलावा, एक बड़ा ऐलान यह है कि कंपनी अपने इक्विटी शेयरों के फेस वैल्यू को ₹10 से घटाकर ₹2 करने जा रही है। स्टॉक स्प्लिट से शेयर की लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि यह छोटे निवेशकों के लिए ज्यादा किफायती हो जाएगा।
UK सब्सिडियरी की शानदार परफॉर्मेंस
कंपनी की यूके सब्सिडियरी, S.P. Apparels UK, ने इस तिमाही में 125% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। इस उछाल का बड़ा कारण नए कस्टमर्स का जुड़ना है, जिन्हें हालिया इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का फायदा मिला है। कंपनी के मैनेजमेंट का भरोसा कायम है और उन्होंने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹2,000 करोड़ के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का लक्ष्य बनाए रखा है।
नए प्रोडक्ट्स और एक्सपांशन प्लान
कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए भी तैयार है। अपने डिविजन 'Young Brand Apparel' के तहत, कंपनी ₹10 करोड़ के निवेश से मोल्डेड ब्रा सेगमेंट में कदम रखने की तैयारी में है। इस नई लाइन से 2028 फाइनेंशियल ईयर से रेवेन्यू आना शुरू हो जाएगा। वहीं, श्रीलंका में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज अब फुल कैपेसिटी पर काम कर रही हैं और जॉब-वर्क अरेंजमेंट्स के जरिए ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर हैं।
एक्सपोर्ट पर निर्भरता और अन्य जोखिम
कंपनी के 80% से ज्यादा रेवेन्यू एक्सपोर्ट से आता है, खासकर यूके से। इस एक मार्केट पर अत्यधिक निर्भरता कंपनी के लिए एक बड़ा रिस्क है। इसके अलावा, कॉटन जैसे रॉ मैटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से ऑपरेटिंग मार्जिन प्रभावित हो सकता है। यूएस टैरिफ से जुड़े ऑर्डर में देरी और नए प्रोडक्शन लाइनों को बढ़ाने में एग्जीक्यूशन रिस्क भी कंपनी के सामने हैं। इन मार्जिन सुधारों की निरंतरता कंपनी की इन सेक्टर-स्पेसिफिक दबावों से निपटने और विस्तार योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
