Q3 में दिखा बड़ा झटका, 9 महीने के नतीजों में मिलाजुला हाल
Premco Global Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं। नतीजों से पता चलता है कि कंपनी के तीसरी तिमाही के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है।
स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस (Q3 FY26):
कंपनी के ऑपरेशन से रेवेन्यू में साल-दर-साल (YoY) लगभग 41.8% की गिरावट आई है, जो पिछले साल की ₹1633.27 करोड़ की तुलना में घटकर ₹949.35 करोड़ रह गया। नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में तो और भी बड़ी सेंध लगी है, जो 97.0% YoY गिरकर सिर्फ ₹43.52 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹1455.98 करोड़ था। इसी के चलते स्टैंडअलोन बेसिक और डाइल्यूटेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी गिरकर ₹1.31 हो गया, जो पिछले साल ₹44.10 था।
कंसॉलिडेटेड परफॉर्मेंस (Q3 FY26):
कंसॉलिडेटेड आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा। ऑपरेशन से रेवेन्यू में 39.6% YoY की गिरावट आई, जो ₹2794.89 करोड़ से घटकर ₹1686.91 करोड़ रह गया। नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 81.0% YoY की बड़ी गिरावट देखी गई, जो ₹901.22 करोड़ से घटकर ₹170.72 करोड़ रह गया। कंसॉलिडेटेड बेसिक/डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) मामूली गिरकर ₹5.16 रहा।
नौ महीनों का प्रदर्शन (9M FY26):
नौ महीनों की बात करें तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू 11.6% YoY घटकर ₹4289.90 करोड़ रहा। हालांकि, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 19.5% YoY की बढ़त दर्ज की गई, जो ₹1219.16 करोड़ से बढ़कर ₹1457.42 करोड़ हो गया। स्टैंडअलोन ईपीएस (EPS) भी ₹36.89 से बढ़कर ₹44.10 हो गया।
कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू नौ महीनों में 10.9% YoY घटकर ₹7226.59 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 8.8% YoY घटकर ₹703.45 करोड़ दर्ज किया गया। कंसॉलिडेटेड ईपीएस (EPS) में मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹20.32 से बढ़कर ₹21.29 हो गया।
फाइनेंशियल हाइलाइट्स और डिविडेंड
इन नतीजों के बीच, कंपनी ने FY2025-26 के लिए ₹1/- प्रति शेयर (10%) का दूसरा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है। इसके अलावा, फैसिलिटी रीलोकेशन से जुड़े कुछ छोटे खर्चे भी दर्ज किए गए हैं, जिसमें पीथमपुर फैसिलिटी के लिए ₹10.31 लाख (स्टैंडअलोन) और वापी फैसिलिटी के लिए ₹53.67 लाख (कंसॉलिडेटेड) शामिल हैं। सरकार द्वारा नए लेबर कोड लागू किए गए हैं, लेकिन कंपनी का मानना है कि फिलहाल इससे कोई खास वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा।
🚩 भविष्य की चिंताएं
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मैनेजमेंट ने भविष्य के लिए कोई आउटलुक (Outlook) या गाइडेंस (Guidance) नहीं दिया है। तीसरी तिमाही में नेट प्रॉफिट में इतनी बड़ी गिरावट (खासकर स्टैंडअलोन आधार पर) मांग, लागत दबाव या परिचालन चुनौतियों की ओर इशारा करती है। हालांकि नौ महीने का स्टैंडअलोन प्रॉफिट ग्रोथ एक अच्छी बात है, लेकिन कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट में गिरावट और Q3 का बड़ा झटका निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। नए लेबर कोड के प्रभाव पर भी नजर रखनी होगी।