मुनाफे में स्टैंडअलोन, घाटे में कंसॉलिडेटेड
Kitex Garments Limited के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे एक मिलाजुला संकेत दे रहे हैं। एक तरफ कंपनी ने स्टैंडअलोन (Standalone) बेसिस पर अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ कंसॉलिडेटेड (Consolidated) नतीजों में भारी घाटा सामने आया है।
स्टैंडअलोन प्रदर्शन: कंपनी के ऑपरेशन्स से रेवेन्यू (Revenue from Operations) में 36.84% की जोरदार सालाना बढ़त देखी गई, जो Q3 FY25 के ₹120.10 करोड़ से बढ़कर Q3 FY26 में ₹164.35 करोड़ हो गया। कुल इनकम (Total Income) भी 13.49% बढ़कर ₹136.30 करोड़ दर्ज की गई। हालांकि, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 4.77% की मामूली गिरावट आई है, जो ₹108.73 करोड़ से घटकर ₹103.54 करोड़ रहा। पर, पिछली तिमाही (Q2 FY26) की तुलना में नेट प्रॉफिट में 138.57% की शानदार उछाल आई है।
कंसॉलिडेटेड प्रदर्शन: कंसॉलिडेटेड बेसिस पर तस्वीर बिलकुल अलग और चिंताजनक है। कुल इनकम में 34.23% की भारी गिरावट आई है, जो ₹284.36 करोड़ से घटकर ₹187.00 करोड़ रह गई। इसी वजह से, Q3 FY25 में ₹40.52 करोड़ का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट (Consolidated Profit) अब ₹17.00 करोड़ के नेट लॉस (Net Loss) में बदल गया है। पिछली तिमाही (Q2 FY26) के ₹6.22 करोड़ के घाटे की तुलना में यह घाटा और बढ़ गया है।
🚨 ऑडिटर की बड़ी चिंता: यूएस इन्वेस्टमेंट
इस नतीजों के बीच सबसे बड़ी चिंता कंपनी के ऑडिटर की रिपोर्ट से जुड़ी है। ऑडिटर ने Kitex USA LLC में कंपनी के ₹2776.24 लाख (यानी ₹27.76 करोड़) के इन्वेस्टमेंट की रिकवरी (Recoverability) पर टिप्पणी करने में असमर्थता जताई है। उनका कहना है कि मैनेजमेंट इस इन्वेस्टमेंट के वैल्यूएशन के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दे पाया है। यह चिंता ऑडिटर की पिछली रिपोर्ट्स में भी बनी हुई थी, जो एक गंभीर रेड फ्लैग है।
📈 आगे का रास्ता और रिस्क
ऑडिटर की यह टिप्पणी कि वे ₹27.76 करोड़ के यूएस सब्सिडियरी में इन्वेस्टमेंट की रिकवरी के बारे में कुछ नहीं कह सकते, सीधे तौर पर कंपनी के वास्तविक वित्तीय स्वास्थ्य पर सवाल खड़े करती है। अगर यह इन्वेस्टमेंट रिकवर नहीं हो पाता है, तो कंपनी को बड़ा राइट-डाउन (Write-down) झेलना पड़ सकता है। निवेशकों को इस यूएस सब्सिडियरी से जुड़ी खबरों पर पैनी नज़र रखनी होगी।
इसके अलावा, बोर्ड ने टेक्सटाइल बिज़नेस को Kitex Garments Limited में डीमर्ज (Demerge) करने की एक स्कीम को मंजूरी दी है, जो रेगुलेटरी अप्रूवल के अधीन है। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि नए लेबर कोड का फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।