India Leather Sector संकट में: भू-राजनीतिक शिपिंग बाधाओं से लागत **60%** बढ़ी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Leather Sector संकट में: भू-राजनीतिक शिपिंग बाधाओं से लागत **60%** बढ़ी
Overview

भारत का चमड़ा और जूते-चप्पल बनाने वाला उद्योग इन दिनों बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण शिपिंग में आई रुकावटों ने कच्चे माल की लागत को **60%** तक बढ़ा दिया है।

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शिपिंग संकट ने बढ़ाई इनपुट कॉस्ट 60% तक

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत के चमड़ा और फुटवियर उद्योग पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों में आई रुकावटों ने महत्वपूर्ण कच्चे माल की लागत को 60% तक बढ़ा दिया है। खास तौर पर, ईरान और आसपास के इलाकों में तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग मार्गों पर गंभीर असर पड़ा है। इससे पेट्रोलियम-आधारित कंपोनेंट्स जैसे कुछ रबर केमिकल्स, PU लेदर, एडहेसिव (adhesives), प्लास्टिक और शू सोल की लागत और डिलीवरी टाइम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वैश्विक स्तर पर सिंथेटिक लेदर की कीमतों में पहले से ही 15-20% की बढ़ोतरी देखी जा रही थी, और अब यह समस्या और बढ़ गई है।

इंडस्ट्री की सरकार से राहत की मांग

इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, उद्योग ने सरकार से तत्काल राहत की मांग की है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, उन्होंने सिंथेटिक लेदर (PU-coated fabrics), फुटवियर कंपोनेंट्स, मेटल एक्सेसरीज, मशीनरी, धागे, मोल्ड्स, टो पफ्स, आईलेट्स और विशेष चमड़ा रसायनों जैसे आवश्यक आयात पर ड्यूटी छूट (duty exemptions) देने की गुहार लगाई है। इसके साथ ही, उन्होंने प्रपोज्ड FOOTWEAR और लेदर ओरिएंटेड ट्रांसफॉर्मेशन (FLOAT) स्कीम को तेजी से और पूरी तरह से लागू करने पर भी जोर दिया है। यह स्कीम कच्चे माल से लेकर निर्यात प्रोत्साहन तक पूरे उत्पाद रेंज में एकीकृत सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।

आयात पर निर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

यह संकट भारत की आयात पर भारी निर्भरता को भी उजागर करता है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स चीन, कोरिया, इंडोनेशिया और जापान जैसे देशों से मंगाए जाते हैं। इससे भारतीय फर्मों की सप्लाई चेन कमजोर पड़ जाती है और वे वैश्विक व्यापार तनाव व लॉजिस्टिकल बाधाओं के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं। वैश्विक स्तर पर वियतनाम और चीन जैसे देशों के पास बड़े पैमाने पर एकीकृत विनिर्माण (integrated manufacturing) और कम परिचालन लागत है, जिससे भारतीय फर्मों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है।

निर्यात पर असर और कंपनियों की स्थिति

सेक्टर के निर्यात प्रदर्शन पर भी इसका असर दिख रहा है। 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर में चमड़ा और चमड़े के उत्पादों का निर्यात 2.36% घटकर 4.26 बिलियन डॉलर रह गया। कुल सेक्टर निर्यात (गैर-चमड़े वाले सामानों सहित) के 5.6 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। इस मुश्किल माहौल में Bata India (मार्केट कैप ~₹25,000 करोड़, P/E ~45) और Relaxo Footwears (मार्केट कैप ~₹18,000 करोड़, P/E ~55) जैसी कंपनियां काम कर रही हैं। इन कंपनियों के वैल्यूएशन (valuations) बताते हैं कि बाजार इन चुनौतियों के बावजूद ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है।

आगे की राह: संरचनात्मक सुधारों की जरूरत

यह भू-राजनीतिक झटका भारत की चमड़ा और फुटवियर सप्लाई चेन की अंतर्निहित नाजुकता को और बढ़ाता है। संरचनात्मक सुधारों के बिना, जैसे कि बैकवर्ड इंटीग्रेशन (backward integration), घरेलू कच्चे माल का विकास और टेक्नोलॉजी अपनाना, यह क्षेत्र भविष्य में सप्लाई चेन के झटकों से प्रभावी ढंग से निपटने में संघर्ष कर सकता है।

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