Textile Industry: कॉटन इंपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री रियायत बढ़ाने की मांग, सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव?

TEXTILE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Textile Industry: कॉटन इंपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री रियायत बढ़ाने की मांग, सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव?

भारत का टेक्सटाइल सेक्टर सरकार से कच्चे कॉटन (Raw Cotton) के इंपोर्ट पर मिलने वाली ड्यूटी-फ्री छूट को **31 अक्टूबर 2026** के आगे बढ़ाने की अपील कर रहा है। यार्न की कीमतों में **60%** की भारी उछाल और घरेलू उत्पादन में गिरावट के कारण एक्सपोर्टर्स सप्लाई चेन टूटने की चिंता जता रहे हैं।

रियायत की मांग क्यों?

Tiruppur Exporters Association सहित कई इंडस्ट्री बॉडीज सरकार से गुहार लगा रही हैं कि इंपोर्ट पर मिलने वाली टैक्स छूट को आगे बढ़ाया जाए। इस समय सेक्टर भारी कॉस्ट प्रेशर से जूझ रहा है। साल 2026 में कच्चे कॉटन की कीमतों में 20% की बढ़त हुई है, जबकि कॉटन यार्न के दाम 60% तक बढ़ गए हैं। यह स्थिति अपैरल एक्सपोर्टर्स के प्रॉफिट मार्जिन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।

उत्पादन में गिरावट का संकट

इस संकट की जड़ में घरेलू उत्पादन में आती कमी है। 2025-26 सीजन में देश का कुल उत्पादन घटकर करीब 290 लाख गांठ (bales) रहने का अनुमान है। गुजरात, तेलंगाना और महाराष्ट्र में खराब बारिश के कारण आने वाली फसल की क्वालिटी और क्वांटिटी को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे मिलें सप्लाई को लेकर डरी हुई हैं।

सरकार के सामने चुनौती

सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं है। एक तरफ इंडस्ट्री को सस्ता माल चाहिए, तो दूसरी तरफ किसान यूनियनें इस मांग का विरोध कर रही हैं। किसानों का तर्क है कि हार्वेस्ट सीजन के दौरान अगर बाहर से टैक्स-फ्री कॉटन आता रहा, तो घरेलू फसलों के दाम गिर सकते हैं।

निवेशकों के लिए संकेत

टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए सरकार का यह निर्णय एक 'क्रिटिकल मॉनिटरेबल' है। यदि यह छूट नहीं बढ़ाई गई, तो स्पिनिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर उनके नेट प्रॉफिट पर पड़ेगा। बाजार अब 31 अक्टूबर की डेडलाइन और आगामी फसल के डेटा पर अपनी नजरें टिकाए हुए है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.