📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
कंपनी के तिमाही नतीजों पर नजर डालें तो, Indian Terrain Fashions Limited ने Q3 FY26 में ₹2.56 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) में हुए ₹3.44 करोड़ के नेट लॉस के मुकाबले एक बड़ी वापसी है। न केवल साल-दर-साल, बल्कि पिछली तिमाही (Q2 FY26) के ₹0.38 करोड़ के घाटे से भी कंपनी अब मुनाफे में आ गई है।
रेवेन्यू के मोर्चे पर भी कंपनी ने बढ़त दर्ज की है। Q3 FY26 में कुल रेवेन्यू 4.66% बढ़कर ₹101.40 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹96.88 करोड़ था। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी रेवेन्यू में 0.44% की मामूली बढ़त देखी गई।
9 महीने (9M FY26) के नतीजों पर गौर करें तो, कंपनी का कुल रेवेन्यू 7.99% बढ़कर ₹271.14 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹251.07 करोड़ था। सबसे अहम बात यह है कि 9 महीनों में कंपनी का नेट लॉस काफी कम होकर ₹4.01 करोड़ रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹40.48 करोड़ का भारी भरकम घाटा था।
Earnings Per Share (EPS) में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। Q3 FY26 के लिए बेसिक EPS ₹0.51 रहा, जो पिछले साल के ₹(0.75) की तुलना में काफी बेहतर है। वहीं, 9 महीनों (9M FY26) के लिए बेसिक EPS ₹(0.79) दर्ज किया गया, जो पिछले साल के ₹(8.85) के मुकाबले घाटे में भारी कमी को दर्शाता है।
एक अहम प्रोविजनिंग (Provisioning)
नतीजों के साथ एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। कंपनी ने ₹0.58 करोड़ का एक असाधारण खर्च (Exceptional Item) दर्ज किया है। यह खर्च सरकार द्वारा नए लेबर कोड लागू किए जाने के बाद ग्रेच्युटी (Gratuity) और कॉम्पनसेटेड एब्सेंस (Compensated Absences) के लिए की गई एक-बार की प्रोविजनिंग (Provisioning) है। इसका मतलब है कि कंपनी भविष्य में संभावित बढ़ी हुई लागतों को अभी से अपने खाते में दर्ज कर रही है।
आगे क्या? (So What?)
भले ही Q3 के नतीजे पॉजिटिव रहे हों, लेकिन 9 महीनों के दौरान ₹4.01 करोड़ का नेट लॉस अभी भी एक चिंता का विषय बना हुआ है। Q3 में रेवेन्यू ग्रोथ 4.66% की मामूली रही, जो दर्शाता है कि कंपनी की टॉप-लाइन अभी उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही जिसकी उम्मीद की जा रही थी। नए लेबर कोड के कारण भविष्य में लागत बढ़ने की आशंकाएं बनी हुई हैं, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी। रिटेल निवेशकों के लिए यह एक अच्छा संकेत है कि कंपनी घाटे से मुनाफे में आई है, लेकिन इस तिमाही के मुनाफे की निरंतरता और पूरे फाइनेंशियल ईयर में लगातार प्रॉफिटेबल बने रहने की राह अभी देखनी होगी।
