यह डील भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत, अमेरिकी बाज़ार में भारतीय सामानों पर लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी (टैरिफ) को काफी कम कर दिया गया है। अब यह दरें 18% पर आ गई हैं, जो कि पहले 50% तक पहुंच गई थीं।
टैरिफ में कटौती से एक्सपोर्टर्स का बढ़ा हौसला
इस भारी कटौती से भारतीय उत्पादों की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धात्मकता) में ज़बरदस्त सुधार होगा। खासकर उन सेक्टर्स के लिए ये बड़ी खुशखबरी है, जो पिछले कुछ समय से ऊंचे टैरिफ के चलते मार झेल रहे थे। अब भारत के टेक्सटाइल्स (Textiles), कारपेट्स (Carpets), चमड़े के सामान और जेम्स (Gems) जैसे उत्पादों को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिलेगी।
तुलनात्मक बढ़त और बाज़ार की प्रतिक्रिया
जैसे, पहले भारतीय गारमेंट्स पर जो टैरिफ बहुत ज़्यादा थे, वे अब 18% हो गए हैं। इसकी तुलना में, बांग्लादेश के गारमेंट्स पर 20% और श्रीलंका के परिधानों पर 44% टैरिफ लगता है। वहीं, तुर्की के कारपेट्स पहले से ही कम टैरिफ (लगभग 15%) पर अमेरिका में बिक रहे थे, जिससे भारतीय कारपेट एक्सपोर्टर्स को नुकसान हो रहा था। अब 18% टैरिफ के साथ भारतीय कारपेट्स फिर से बाज़ार में अपनी जगह बना पाएंगे। सबसे अहम बात यह है कि चीनी सामानों पर लगने वाले 34% टैरिफ से भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ काफी कम है, जो कि एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एज (Competitive Edge) देगा।
इस डील की खबर आते ही शेयर बाज़ार में भी ज़बरदस्त उत्साह देखने को मिला। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) फ्यूचर्स में करीब 800 अंकों (points) का उछाल दर्ज किया गया, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
मंत्रियों और उद्योगपतियों ने सराहा
इस ऐतिहासिक समझौते पर केंद्रीय मंत्रियों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने खुशी ज़ाहिर की है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे 'ऐतिहासिक मोड़' बताते हुए कहा कि यह दोनों बड़े लोकतंत्रों के साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की शक्ति को खोलेगा। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे 'भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक बड़ा दिन' बताया, जिससे आपसी विकास को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे 'विन-विन' (Win-Win) डील करार दिया, जो दोनों देशों की पूरक ताकतों का उपयोग कर नवाचार को गति दे सकती है। आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने भी इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह सप्लाई चेन (Supply Chain) को मजबूत करेगा और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग के नए अवसर खोलेगा।
यह समझौता महीनों की बातचीत और टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों के बाद हुआ है, जो द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव के प्रति नई प्रतिबद्धता को दर्शाता है।