India-UK Trade Pact: टेक्सटाइल सेक्टर में आई बहार, **12%** तक घटे टेरिफ से एक्सपोर्ट होगा आसान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India-UK Trade Pact: टेक्सटाइल सेक्टर में आई बहार, **12%** तक घटे टेरिफ से एक्सपोर्ट होगा आसान

भारत और यूके (UK) के बीच हुए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के बाद से टेक्सटाइल सेक्टर के लिए रास्ते खुल गए हैं। **15 जुलाई, 2026** से लागू हुए इस समझौते के तहत **12%** तक का टेरिफ खत्म कर दिया गया है, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को वैश्विक बाजार में बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।

बाजार में नई प्रतिस्पर्धा

15 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुए इस ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट ने घरेलू टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए गेम-चेंजर का काम किया है। अब तक भारतीय कंपनियां 9.6% से 12% तक के भारी-भरकम टेरिफ के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले पिछड़ रही थीं। इस एग्रीमेंट ने उस खाई को पाट दिया है, जिससे अब भारतीय फर्म अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पाने की होड़ में पूरी मजबूती से खड़ी हो सकेंगी।

निवेशकों के लिए संकेत

इन्वेस्टर्स के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव है, क्योंकि एक्सपोर्ट वॉल्यूम और प्रॉफिट मार्जिन में सुधार की पूरी संभावना है। कंपनियां अब अपनी यूके एक्सपोर्ट स्ट्रैटेजी को फिर से तैयार कर रही हैं। साथ ही, सबकी नजरें अब EU-India Free Trade Agreement पर भी हैं, जिसके लागू होने के बाद यूरोप के बाजार में भी भारतीय टेक्सटाइल की पहुंच और बढ़ेगी।

सरकारी प्रयास और चुनौतियां

सरकार एक्सपोर्टर्स को इस बदलाव का फायदा दिलाने के लिए देशभर में वर्कशॉप चला रही है। अहमदाबाद, कोयंबटूर, इचलकरंजी, सोलापुर, पानीपत और जयपुर जैसे प्रमुख क्लस्टर्स में छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को रेगुलेटरी कंप्लायंस समझाने का काम किया जा रहा है।

हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि यह एग्रीमेंट 'रेसिप्रोकल' है, यानी भारत भी कुछ इम्पोर्ट ड्यूटीज कम करेगा, जिससे घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील पर भी सेक्टर की निगाहें टिकी हैं, जो भविष्य में एक और बड़ा ट्रिगर साबित हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.