Union Budget 2025-26: टेक्सटाइल इंडस्ट्री में नई जान! फाइबर पर जोर, RSWM के लिए क्या है खास?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Union Budget 2025-26: टेक्सटाइल इंडस्ट्री में नई जान! फाइबर पर जोर, RSWM के लिए क्या है खास?
Overview

Union Budget 2025-26 के ऐलान के साथ ही भारत का टेक्सटाइल सेक्टर नई राह पर है। सरकार ने नेशनल फाइबर स्कीम और कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन जैसी खास पहलों पर जोर दिया है, जिसका मकसद इंडस्ट्री को और आत्मनिर्भर बनाना है।

बजट का बड़ा दांव: फाइबर से आत्मनिर्भरता तक

Union Budget 2025-26 में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। सरकार की योजना है कि कॉटन प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए एक मिशन चलाया जाए और साथ ही नेशनल फाइबर स्कीम के तहत प्राकृतिक, मैन-मेड और नए जमाने के फाइबर में देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉटन प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाले मिशन के लिए ₹5,900 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। इसका मकसद सप्लाई चेन को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

RSWM Limited की स्थिति और चुनौतियां

इस पॉलिसी बदलाव का फायदा RSWM Limited जैसी बड़ी यार्न बनाने वाली कंपनियों को मिल सकता है। हालांकि, कंपनी को फिलहाल बाजार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जनवरी 2026 के अंत तक, RSWM के शेयर का भाव करीब ₹130-₹140 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 18-23% नीचे था।

कंपनी ने Q2 FY26 में ₹6.28 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के नुकसान से बेहतर है। लेकिन, रेवेन्यू में थोड़ी गिरावट देखी गई। जनवरी 2026 में RSWM का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹616 करोड़ से ₹662 करोड़ के बीच रहा। चिंता की बात यह है कि कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो काफी हाई यानी 80x से 98x के बीच बना हुआ है। यह बताता है कि बाजार को कंपनी से भविष्य में बहुत बड़े मुनाफे की उम्मीद है, या मौजूदा मुनाफे के हिसाब से शेयर महंगा हो सकता है।

सेक्टर का भविष्य और ग्लोबल ट्रेंड्स

सरकार की Mega Textile Parks और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर जोर देने की योजना, इंडस्ट्री के बड़े ट्रेंड्स के अनुरूप है। अनुमान है कि 2025 में भारतीय टेक्सटाइल मार्केट का आकार 152.40 अरब डॉलर था, और यह तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इस सेक्टर के बिजनेस का आकार 350 अरब डॉलर और एक्सपोर्ट को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

EU के साथ हुए नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, खासकर यूरोपियन यूनियन में। दूसरी ओर, नवंबर 2025 में अमेरिका को टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट में 31.4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

Welspun India, Grasim Industries, और Arvind Ltd जैसी बड़ी और मजबूत फाइनेंशियल वाली कंपनियां इन मौकों का फायदा उठाने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। RSWM Limited भी LNJ Greenpet Private Limited को खरीदने और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश जैसी स्ट्रैटेजिक चालें चल रही है।

आगे की राह: उम्मीदें और योजनाएं

बजट से मिली प्रेरणा और ग्लोबल ट्रेड की बदलती तस्वीर, भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक मिली-जुली उम्मीद जगाती है। सरकारी योजनाओं की सफलता, उनके लागू होने के तरीके और निवेश पर निर्भर करेगी।

जनवरी 2026 तक, RSWM Limited के लिए एनालिस्ट की राय 'होल्ड' (Hold) थी, जिसमें टारगेट प्राइस ₹186 के आसपास रखा गया था। सेक्टर का ग्रोथ भविष्य में सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) के नियमों को अपनाने, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने और खासकर अमेरिका व EU जैसे प्रमुख बाजारों में इंटरनेशनल ट्रेड की जटिलताओं को संभालने की क्षमता पर टिका रहेगा।

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