क्यों गिरी सेक्टर की चाल?
टेक्सटाइल और अपैरल (apparel) सेक्टर में मार्च के दौरान उत्पादन में भारी संकुचन देखा गया। यह मौजूदा महंगाई और वैश्विक संघर्षों का मिलाजुला असर है, जो इंडस्ट्री की गहरी कमजोरियों को भी उजागर कर रहा है।
कच्चे माल की कीमतों में आग
निर्माताओं को जरूरी कच्चे माल के लिए भारी कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। कॉटन यार्न (cotton yarn) की कीमतें इस महीने 20% चढ़ गईं, जबकि पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर (polymers) 50% तक महंगे हो गए। डाइंग (dyeing) के लिए जरूरी डाइज (dyes) और केमिकल्स (chemicals) 40% तक महंगे हुए, और कागज की लागत 10% बढ़ गई। इन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा संबंध वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल से है, खासकर मार्च 2026 में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) के फ्यूचर्स (futures) 40% से बढ़कर $100 प्रति बैरल के पार चले गए। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों ने प्रमुख व्यापारिक मार्गों और ऊर्जा प्रवाह को बाधित किया है, जिससे प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) और मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG) जैसे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक (petrochemical feedstock) की कीमतें करीब 30% बढ़ गई हैं। ये बढ़ती लागतें पॉलीस्टर (polyester) के उत्पादन को भी प्रभावित कर रही हैं, जो दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फाइबर है और सीधे तौर पर तेल से जुड़ा है।
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट्स में बड़ी गिरावट
टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग में 3.6% (साल-दर-साल) और अपैरल प्रोडक्शन में 14.6% की तेज गिरावट व्यापक मंदी का संकेत देती है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए, टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट्स पिछले साल के मुकाबले 2.21% गिरकर कुल $35.8 बिलियन रहे। वहीं, मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, टेक्सटाइल एक्सपोर्ट्स 9.91% और अपैरल एक्सपोर्ट्स 18.99% गिरे, जिससे महीने में सेक्टर की संयुक्त गिरावट 14.02% हो गई। यह भारी गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मार्च 2026 में 45 महीने के निचले स्तर 53.9 पर आ गया, जो सितंबर 2021 के बाद सबसे कमजोर विस्तार था। PMI में आई इस सुस्ती का कारण इनपुट लागतों में वृद्धि, घरेलू मांग में नरमी और मध्य पूर्व संघर्षों से बढ़ी बाजार अनिश्चितता रही। हालांकि मार्च में एक्सपोर्ट आर्डर्स में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई, लेकिन यह कमजोर घरेलू मांग और ऑपरेशनल चुनौतियों की भरपाई नहीं कर पाई।
शिपिंग और ग्लोबल कंपटीशन पर युद्ध का असर
ईरान युद्ध ने शिपिंग में बाधाओं, बढ़े हुए फ्रेट (freight) और युद्ध-जोखिम बीमा लागतों, और अस्थिर ऊर्जा कीमतों के कारण महत्वपूर्ण समस्याएं पैदा की हैं। इससे भारतीय फर्मों की अंतिम लागतें बढ़ी हैं और वर्किंग कैपिटल (working capital) पर दबाव पड़ा है। महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों, जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना, इन समस्याओं को और बढ़ा रहा है, जिससे वैश्विक टेक्सटाइल उत्पादन लागत 10-15% तक बढ़ सकती है। प्रतिस्पर्धी देश भी दबाव महसूस कर रहे हैं। बांग्लादेश (Bangladesh) के रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर का एक्सपोर्ट मार्च 2026 में साल-दर-साल 19.35% गिर गया, जो उसके अपने ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यवधानों से प्रभावित हुआ। हालांकि बांग्लादेश अमेरिका (United States) में प्रतिस्पर्धी बना हुआ है, लेकिन भारत और वियतनाम (Vietnam) जैसे देश व्यापार सौदों के कारण यूके (United Kingdom) जैसे बाजारों में अपनी पकड़ बना रहे हैं। यह कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा, बढ़ती घरेलू लागतों के साथ मिलकर, भारतीय निर्माताओं को मुश्किल स्थिति में डाल रही है।
सिकुड़ते मार्जिन्स और स्ट्रक्चरल कमजोरियां
वर्तमान संकट भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर की अचानक मूल्य वृद्धि और वैश्विक अस्थिरता के प्रति भेद्यता को उजागर करता है। पॉलीस्टर पर इसकी निर्भरता, जो तेल से जुड़ा है, इस सेक्टर को सीधे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है। निर्माता 'डबल स्क्वीज' (double squeeze) का सामना कर रहे हैं: कमजोर घरेलू उपभोक्ता खर्च और कमजोर एक्सपोर्ट डिमांड, साथ ही सामग्री, उत्पादन और शिपिंग की बढ़ती लागतें। वर्किंग कैपिटल तंग हो रहा है। कुछ कंपनियां, जैसे बिंदल सिल्क मिल्स (Bindal Silk Mills), लागतें ग्राहकों पर डालने को मजबूर हैं, जिससे आर्डर खोने का खतरा है, जबकि अन्य, जैसे राधेश्याम टेक्सटाइल (Radheshyam Textile), मशीनरी बंद कर चुके हैं। मार्च 2026 में इनपुट कीमतें बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचना, साथ ही गैस की कमी जैसी ऑपरेशनल समस्याएं जो श्रम को प्रभावित कर रही हैं, मुनाफे के लिए एक गंभीर तस्वीर पेश करती हैं। अधिक स्थिर ऊर्जा वाले या बेहतर व्यापार पहुंच वाले प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, भारतीय फर्मों को उच्च लागत और कड़ी मूल्य प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
जारी चुनौतियों के बीच सतर्क आउटलुक
भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए अल्पावधि का आउटलुक (outlook) सतर्क बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनाव, अस्थिर कमोडिटी कीमतें और इंफ्लेशन (inflation) मार्जिन्स को टाइट और उत्पादन को सीमित रखने की उम्मीद है। हालांकि सरकार की 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम जैसी पहलें मैन-मेड और टेक्निकल टेक्सटाइल (technical textiles) में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती हैं, लेकिन उनका तत्काल प्रभाव शायद बढ़ती लागतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की तात्कालिक समस्याओं को पूरी तरह से हल न कर पाए। आने वाले महीनों में इंडस्ट्री की इन झटकों को झेलने और सोर्सिंग (sourcing) व उत्पादन रणनीतियों को अपनाने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
