Silk Industry: भारत का बड़ा दांव, 2031 तक सिल्क प्रोडक्शन को **60,000 टन** ले जाने का लक्ष्य

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Silk Industry: भारत का बड़ा दांव, 2031 तक सिल्क प्रोडक्शन को **60,000 टन** ले जाने का लक्ष्य

सरकार ने सिल्क इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। साल 2030-31 तक सालाना सिल्क प्रोडक्शन को **60,000 टन** तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे टेक्सटाइल कंपनियों को कच्चा माल सस्ती और स्थिर दरों पर मिल सकेगा।

उत्पादन में भारी उछाल की तैयारी

भारत सरकार ने देश को दुनिया का लीडिंग सिल्क उत्पादक बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। फाइनेंशियल ईयर 2028-29 तक इसे हकीकत में बदलने का रोडमैप तैयार है। वर्तमान में भारत का कुल सिल्क प्रोडक्शन 42,000 टन है, जो कि 2014 में महज 26,000 टन था। इस रफ्तार को देखते हुए सरकार अब 2030-31 तक इसे 60,000 टन के पार ले जाना चाहती है।

टेक्सटाइल कंपनियों को कैसे होगा फायदा?

अभी भारत को रॉ सिल्क के लिए मुख्य रूप से चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। इस इंपोर्ट डिपेंडेंसी की वजह से भारतीय टेक्सटाइल मिलों को ग्लोबल सप्लाई चेन के उतार-चढ़ाव और करेंसी रिस्क का सामना करना पड़ता है। अगर घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ता है और क्वालिटी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के बराबर होती है, तो टेक्सटाइल कंपनियों के रॉ मटेरियल कॉस्ट में स्थिरता आएगी, जिससे उनका मार्जिन बेहतर हो सकता है।

मॉडर्नाइजेशन और चुनौतियां

टेक्सटाइल मिनिस्ट्री अब इस सेक्टर में मॉडर्न तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर रही है। हाइब्रिड सिल्कवॉर्म की नई वैरायटी लाई जा रही है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि सेरीकल्चर एक एग्रीकल्चरल एक्टिविटी है, जो मौसम और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

इसके अलावा, सरकार ने किसानों की आय को ₹10 लाख से ₹12 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, ताकि क्वालिटी प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल सके। निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बात यह होगी कि सरकार के ये सपोर्ट मैकेनिज्म जमीन स्तर पर कितनी तेजी से असर दिखाते हैं और घरेलू सिल्क की क्वालिटी इंटरनेशनल खरीदारों की डिमांड पूरी कर पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.