सरकार अपने टेक्सटाइल प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को 4 साल और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसमें निवेश की सीमा को कम किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा MSMEs इसका हिस्सा बन सकें। इससे पहले ही प्राइवेट कंपनियों ने **₹41,500 करोड़** का भारी-भरकम निवेश कमिटमेंट किया है, जो मूल अनुमान **₹19,000 करोड़** से कहीं ज्यादा है।
नियम आसान, भागीदारी बढ़ेगी
केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग बेस का दायरा बढ़ाना है। अब तक की शर्तों को सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए मुफीद माना जा रहा था, लेकिन अब सरकार निवेश और टर्नओवर की शर्तों में ढील देने पर विचार कर रही है ताकि छोटे मैन्युफैक्चरर्स भी इस स्कीम का लाभ उठा सकें।
स्कीम की अब तक की स्थिति
सितंबर 2021 में लॉन्च हुई इस स्कीम का मकसद मैन-मेड फाइबर, फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसका शुरुआती बजट ₹10,683 करोड़ रखा गया था। अब तक कुल 170 एप्लीकेंट्स को मंजूरी मिली है। खास बात यह है कि गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स लगाए जा रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
टेक्सटाइल कंपनियों के लिए यह स्कीम सेल्स बढ़ाने का जरिया है, लेकिन इसमें बड़ा कैपिटल खर्च (CAPEX) भी लगता है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां समय पर अपनी कैपेसिटी शुरू कर पा रही हैं या नहीं और क्या वे कर्ज के जाल में तो नहीं फंस रही हैं।
हालांकि, सेक्टर अभी भी कच्चा माल जैसे सिंथेटिक फाइबर और कॉटन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल डिमांड की अनिश्चितता से जूझ रहा है। अब नजरें सरकार की फाइनल नोटिफिकेशन पर टिकी हैं कि मीडियम लेवल की कंपनियों को इसका कितना सीधा लाभ मिलता है।
