भारत अपने टेक्सटाइल सेक्टर को ग्लोबल लीडर बनाने के लिए सस्टेनेबिलिटी पर जोर दे रहा है। 'Tex-Eco Initiative' और PM MITRA पार्कों के जरिए सरकार का लक्ष्य **$350 बिलियन** का मार्केट हासिल करना और सालाना **70.73 लाख टन** टेक्सटाइल वेस्ट का सही मैनेजमेंट करना है।
सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर
भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से निकलकर एक सर्कुलर और रिसोर्स-एफिशिएंट मॉडल की ओर बढ़ रही है। 2026 की मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स की स्टडी के अनुसार, देश में हर साल 70 लाख टन से ज्यादा टेक्सटाइल वेस्ट निकलता है। सरकार अब प्री-कंज्यूमर वेस्ट के 95% रिकवरी के बाद, पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट को रिसाइकिल करने पर ध्यान दे रही है। इसका मकसद दशक के अंत तक $3.5 बिलियन का रिसाइक्लिंग मार्केट खड़ा करना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ESG का तालमेल
सरकार $10 बिलियन के निवेश से सात PM MITRA पार्क तैयार कर रही है, जिनमें वेस्टवॉटर मैनेजमेंट और आधुनिक प्रोसेसिंग फैसिलिटी शामिल हैं। पानीपत और सूरत जैसे बड़े क्लस्टर्स में MSMEs के लिए ESG टास्क फोर्स विशेष टूलकिट लागू कर रही है, ताकि छोटी कंपनियां भी ग्लोबल एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड्स को पूरा कर सकें।
नई पॉलिसी और तकनीक
यूनियन बजट 2026-27 में लॉन्च की गई 'Tex-Eco Initiative' चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है: रिसाइक्लिंग, पानी का संरक्षण, क्षमता निर्माण और डिजिटल इनेबलमेंट। UNIDO के साथ साझेदारी में, सरकार उत्पादन लाइनों से 10,000 टन से अधिक जहरीले रसायनों के उपयोग को कम करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही, ग्लोबल मार्केट की मांग को देखते हुए AI और डिजिटलाइजेशन के जरिए सप्लाई चेन में पारदर्शिता (Traceability) लाने की तैयारी है।
