Cotton Import: सरकार का बड़ा फैसला, कच्चे कपास पर टैक्स छूट **2026** तक बढ़ाई गई

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Cotton Import: सरकार का बड़ा फैसला, कच्चे कपास पर टैक्स छूट **2026** तक बढ़ाई गई

भारत सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर मिलने वाली ड्यूटी छूट को **31 दिसंबर 2026** तक बढ़ा दिया है। इस फैसले से **11%** का प्रभावी टैक्स खत्म हो गया है, जिससे टेक्सटाइल कंपनियों की इनपुट कॉस्ट कम होगी और वे ग्लोबल मार्केट में बेहतर मुकाबला कर सकेंगी।

भारत सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर को राहत देते हुए कच्चे कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी से छूट की अवधि को आगे बढ़ा दिया है। यह छूट अब 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी, जो पहले 31 अक्टूबर 2026 को खत्म होने वाली थी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू टेक्सटाइल सप्लाई चेन को मजबूत करना है।

टैक्स राहत का असर

इस फैसले के तहत 11% का प्रभावी कस्टम टैक्स हटा दिया गया है, जिसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेस शामिल थे। इस राहत से स्पिनिंग मिलों और गारमेंट एक्सपोर्टर्स की लागत में कमी आएगी। यह उन निर्माताओं के लिए काफी अहम है जो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से अच्छी गुणवत्ता वाला कपास मंगाते हैं ताकि वे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के मानकों पर खरे उतर सकें।

इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धात्मकता

कई सालों से भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को तब मुश्किल होती है जब घरेलू कपास की कीमतें ग्लोबल बेंचमार्क से ऊपर चली जाती हैं। ऐसे में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के सामने प्राइस कॉम्पिटिशन में टिकना मुश्किल हो जाता है। यह ड्यूटी वेवर एक सहारा बनकर उभरता है, जो कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा माल हासिल करने में मदद करता है।

चुनौतियां और चिंताएं

हालांकि यह फैसला राहत भरा है, लेकिन इंडस्ट्री का मानना है कि बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बजाय एक स्थायी नीति की जरूरत है। शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन से कंपनियों को लंबे समय के लिए अपने एक्सपोर्ट ऑर्डर प्लान करने में दिक्कत होती है। इसके अलावा, आयात पर निर्भरता बढ़ने से घरेलू किसानों की आमदनी पर भी दबाव पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि कंपनियां इन फैसलों का इस्तेमाल करके अपने एक्सपोर्ट वॉल्यूम को कितना बढ़ा पाती हैं और ग्लोबल फ्रेट दरों जैसे बाहरी जोखिमों को कैसे मैनेज करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.